न्यूज स्कूप : उत्तराखंड के सबसे चर्चित और संवेदनशील अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। लंबे समय से विपक्ष और सोशल मीडिया पर जिस ‘वीआईपी’ (VIP) को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे, उस पर पुलिस ने शनिवार को अपनी चुप्पी तोड़ी है। हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) शेखर सुयाल ने स्पष्ट किया है कि जांच में जिस व्यक्ति को वीआईपी बताया गया था, वह वास्तव में कोई प्रभावशाली हस्ती या नेता नहीं था।
शेखर सुयाल, जो इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी (SIT) के सदस्य भी रह चुके हैं, ने संवाददाताओं को बताया कि अंकिता की चैट और उसके मित्र से पूछताछ में जिस ‘वीआईपी’ का जिक्र आया था, उसकी पहचान हो चुकी है।
पुलिस अधीक्षक शेखर सुयाल के अनुसार, जांच के दौरान पुलिस नोएडा निवासी धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान तक पहुँची। पूछताछ में सामने आया कि:
- रिजॉर्ट में मौजूदगी: धर्मेंद्र अंकिता की हत्या से दो दिन पहले किसी काम के सिलसिले में उस क्षेत्र में गया था।
- भोजन के लिए रुका: वह वनंत्रा रिजॉर्ट में केवल कुछ देर के लिए खाना खाने रुका था।
- कर्मचारियों की पुष्टि: रिजॉर्ट के रिकॉर्ड और वहां काम करने वाले कर्मचारियों से पूछताछ के बाद इस बात की पुष्टि हुई है कि वह कोई वीआईपी नहीं बल्कि एक सामान्य पर्यटक की तरह वहां गया था।
पुलिस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर के दावों ने उत्तराखंड की राजनीति में आग लगा दी है। उर्मिला सनावर, जो पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करती हैं, ने हाल ही में सोशल मीडिया पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं:
- भाजपा नेता का नाम: सनावर ने एक वीडियो में आरोप लगाया कि अंकिता हत्याकांड में शामिल वीआईपी कोई और नहीं बल्कि भाजपा का ‘गट्टू’ नाम का एक नेता है।
- ऑडियो-वीडियो वायरल: सुरेश राठौर के साथ उनकी कथित बातचीत के ऑडियो और वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस पर दबाव बढ़ गया था। शेखर सुयाल ने कहा कि सनावर के दावों को देखते हुए पुलिस का यह स्पष्टीकरण देना अत्यंत आवश्यक था।
पुलिस के इस दावे के बावजूद विपक्ष संतुष्ट नहीं है। कांग्रेस ने इस खुलासे को मामले को दबाने की कोशिश करार दिया है। पार्टी अब मांग कर रही है कि इस पूरे प्रकरण की जांच उच्चतम न्यायालय के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जानी चाहिए। कांग्रेस का तर्क है कि जब तक किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच नहीं होती, तब तक असली ‘गट्टू’ या वीआईपी का सच सामने नहीं आएगा।
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा मामला बन चुका है। पुलिस द्वारा ‘धर्मेंद्र’ का नाम सामने लाने के बाद भी जनता और विपक्षी दलों के मन में सवाल बरकरार हैं। क्या यह वाकई एक गलतफहमी थी या जांच को नया मोड़ देने की कोशिश, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
