न्यूज स्कूप : उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया, जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का एक कथित इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। 2019 बैच के पीसीएस (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के नाम से सामने आए इस पत्र ने शासन और प्रशासन के बीच हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, अभी तक इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अधिकारी का मोबाइल नंबर बंद होने और उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
वायरल हो रहे इस पत्र में राज्यपाल, मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य चुनाव आयुक्त को संबोधित किया गया है। इसमें अधिकारी ने उत्तर प्रदेश प्रान्तीय सिविल सेवा से त्यागपत्र देने की इच्छा प्रकट की है।
वायरल लेटर और सोशल मीडिया पर उनकी पिछली सक्रियता के आधार पर इस्तीफे के दो प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं:
- UGC रेगुलेशन 2026 का विरोध: अलंकार अग्निहोत्री ने कथित तौर पर भारत सरकार द्वारा जारी UGC रेगुलेशन्स 2026 को लेकर अपनी असहमति जताई है। उन्होंने फेसबुक के माध्यम से भी पहले इस एक्ट का विरोध किया था।
- शंकराचार्य के शिष्यों पर कार्रवाई: पत्र में प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ स्थानीय प्रशासन द्वारा कथित तौर पर की गई मारपीट और कार्रवाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई है।
पत्र में अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि उन्हें IIT BHU (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) से बी.टेक करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। वे भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय के आदर्शों से प्रेरित हैं और उनके द्वारा स्थापित मूल्यों के आधार पर ही अपने भाव व्यक्त कर रहे हैं।
उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया है कि वे एक राजपत्रित अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों और कुछ सरकारी नीतियों के चलते वे अब सेवा में बने रहने के इच्छुक नहीं हैं।
| विवरण | जानकारी |
| नाम | अलंकार अग्निहोत्री |
| कैडर / बैच | उत्तर प्रदेश प्रान्तीय सिविल सेवा (2019 बैच) |
| वर्तमान पद | सिटी मजिस्ट्रेट, बरेली |
| शिक्षा | बी.टेक (IIT BHU) |
| विवाद का केंद्र | कथित इस्तीफा और सोशल मीडिया पोस्ट |
इस पूरे घटनाक्रम पर बरेली प्रशासन और उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
- संपर्क से बाहर: सिटी मजिस्ट्रेट का मोबाइल नंबर बंद है, जिसके कारण उनसे सीधे तौर पर संपर्क नहीं हो पा रहा है।
- असमंजस की स्थिति: मोबाइल बंद होने और पत्र के सार्वजनिक होने से प्रशासनिक अधिकारियों के बीच असमंजस बढ़ गया है।
- सोशल मीडिया: उनके फेसबुक अकाउंट पर की गई पोस्ट्स की जांच की जा रही है ताकि मामले की तह तक जाया जा सके।
उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में एक कार्यरत सिटी मजिस्ट्रेट का इस तरह इस्तीफा वायरल होना कोई सामान्य बात नहीं है। यदि यह पत्र वास्तविक है, तो यह शासन के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है। फिलहाल, सभी को सिटी मजिस्ट्रेट के सामने आने या प्रशासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।
