न्यूज स्कूप : आधुनिक जीवनशैली और जंक फूड के बढ़ते चलन के कारण आज अधिकतर लोग पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हमारी संपूर्ण सेहत का रास्ता हमारी आंतों यानी गट हेल्थ (Gut Health) से होकर गुजरता है। आंतों को स्वस्थ रखने के लिए शरीर में ‘गुड बैक्टीरिया’ का होना अनिवार्य है, जो हमें फर्मेंटेड (खमीर युक्त) प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों से मिलते हैं।
जब भी फर्मेंटेड फूड की बात होती है, तो अक्सर लोगों के दिमाग में दक्षिण भारतीय डिशेज जैसे इडली या डोसा ही आता है। लेकिन भारत के विभिन्न कोनों में ऐसी कई पारंपरिक डिशेज हैं, जो स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ प्रोबायोटिक्स का पावरहाउस हैं। आइए जानते हैं भारत के उन 5 यूनिक फर्मेंटेड फूड्स के बारे में, जो आपकी गट हेल्थ के लिए वरदान साबित हो सकते हैं।
असम के पारंपरिक व्यंजनों में खोरिसा का एक विशेष स्थान है। यह एक अनोखा फर्मेंटेड फूड है जिसे बांस की कोमल कोपलों (Bamboo Shoots) से तैयार किया जाता है।
- कैसे बनता है: बांस की कोपलों को कद्दूकस करके पानी में फर्मेंट किया जाता है, जिससे इसमें एक तीखा और वाइब्रेंट टेस्ट आ जाता है।
- फायदा: यह फाइबर और विटामिन से भरपूर होता है, जो पाचन क्रिया को तेज करता है। असम में इसे अचार की तरह या नॉनवेज डिशेज के साथ बड़े चाव से खाया जाता है।
हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर सिक्किम और नेपाल सीमा से सटे इलाकों में गुंदरूक बेहद लोकप्रिय है।
- कैसे बनता है: सरसों, मूली या अन्य पत्तेदार सागों को फर्मेंट करके इसे तैयार किया जाता है और फिर सुखा लिया जाता है।
- फायदा: इसे सूप या अचार के रूप में परोसा जाता है। यह न केवल गट हेल्थ सुधारता है, बल्कि ठंड के मौसम में शरीर को पोषण भी देता है।
सर्दियों और बसंत के मौसम में उत्तर भारत में कांजी खूब पी जाती है। यह एक फर्मेंटेड ड्रिंक है जो प्रोबायोटिक गुणों से लबालब है।
- कैसे बनता है: इसे काली गाजर, चुकंदर और राई के दानों को पानी में फर्मेंट करके बनाया जाता है।
- फायदा: यह विटामिन और मिनरल्स का बेहतरीन स्रोत है। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और पेट को ठंडा रखने में मदद करता है।
पश्चिम बंगाल और ओडिशा में पांता भात एक बेहद लोकप्रिय और सस्ता प्रोबायोटिक भोजन है, जिसे अक्सर बचे हुए चावलों से बनाया जाता है।
- कैसे बनता है: पके हुए चावलों को रात भर पानी में भिगोकर रखा जाता है, जिससे इसमें प्राकृतिक खमीर उठता है। सुबह इसमें दही, कच्चा प्याज, नमक और हरी मिर्च मिलाकर खाया जाता है।
- फायदा: भिगोने की प्रक्रिया चावल के पोषक तत्वों को बढ़ा देती है, जिससे यह पेट के लिए हल्का और सुपाच्य हो जाता है।
दही प्रोबायोटिक्स का सबसे आसान और सुलभ स्रोत है, लेकिन यहाँ एक सावधानी जरूरी है।
- बाजार बनाम घर: मार्केट में मिलने वाले पैकेट बंद दही में अक्सर प्रिजर्वेटिव्स होते हैं और वे उतने प्रभावी नहीं होते। गट हेल्थ के लिए हमेशा घर पर मिट्टी के बर्तन या स्टील के बर्तन में जमाया हुआ ताजा दही ही खाना चाहिए। इसमें जीवित बैक्टीरिया की मात्रा अधिक होती है।
| डिश का नाम | मुख्य सामग्री | क्षेत्र | मुख्य लाभ |
| खोरिसा | बांस की कोपलें | असम | फाइबर और विटामिन से भरपूर |
| गुंदरूक | पत्तेदार साग | हिमालयी क्षेत्र | गुड बैक्टीरिया का भंडार |
| कांजी | गाजर और राई | उत्तर भारत | मेटाबॉलिज्म में सुधार |
| पांता भात | फर्मेंटेड चावल | बंगाल/ओडिशा | पेट की गर्मी शांत करता है |
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही फर्मेंटेड फूड्स के महत्व को स्वीकार करते हैं। अपनी डाइट में इन पारंपरिक भारतीय व्यंजनों को शामिल करके आप न केवल अपने स्वाद को बदल सकते हैं, बल्कि अपनी आंतों को भी नई शक्ति दे सकते हैं। स्वस्थ आंत ही एक स्वस्थ शरीर की नींव है।
