न्यूज स्कूप : बदलती लाइफस्टाइल और प्रदूषण के इस दौर में खुद को संक्रमण से बचाना एक बड़ी चुनौती है। बीमारियों से बचने के लिए अधिकांश भारतीय घरों में उबला हुआ पानी (Boiled Water) पीना एक अनिवार्य आदत बन चुका है। लोग इसे शुद्धता का सबसे भरोसेमंद मानक मानते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पानी को आप ‘सेहत का रक्षक’ मानकर पी रहे हैं, वह आपकी एक छोटी सी लापरवाही की वजह से ‘बीमारियों का घर’ बन सकता है?
अक्सर जानकारी के अभाव में हम पानी उबालने और उसे स्टोर करने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता खत्म हो जाती है। आइए जानते हैं कि उबला हुआ पानी कब और कैसे आपकी सेहत के लिए जोखिम बन जाता है।
आरएमएल (RML) हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग के डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि उबले पानी को लेकर लोग अक्सर लापरवाही बरतते हैं। उनके अनुसार, ये गलतियां सेहत पर भारी पड़ सकती हैं:
- पानी को खुला छोड़ देना: कई लोग पानी उबालने के बाद उसे ठंडा होने के लिए घंटों खुला छोड़ देते हैं। जैसे ही पानी का तापमान कम होता है, हवा में मौजूद सूक्ष्म बैक्टीरिया और धूल के कण उसमें दोबारा पनपने लगते हैं। खुला रखा हुआ उबला पानी साधारण नल के पानी से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
- बार-बार उबालना (Re-boiling): एक ही पानी को बार-बार गर्म करना या उबालना एक आम गलती है। दोबारा उबालने से पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है और इसमें मौजूद नाइट्रेट, आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्वों की सांद्रता (Concentration) बढ़ सकती है, जो किडनी और पाचन तंत्र के लिए नुकसानदायक है।
- गंदे बर्तनों में भंडारण: उबले हुए पानी को किसी भी पुराने या बिना धुले प्लास्टिक कंटेनर में भरकर रखना संक्रमण को दावत देना है। यदि बर्तन पूरी तरह साफ नहीं है, तो पानी उबालने का कोई लाभ नहीं मिलता।
यदि उबले पानी को सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए, तो इसके लक्षण जल्दी ही शरीर पर दिखने लगते हैं:
- पाचन संबंधी समस्याएं: पेट में दर्द, मरोड़, गैस और एसिडिटी।
- संक्रमण: कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों में उल्टी और दस्त (Diarrhea) की समस्या।
- स्वाद और गंध में बदलाव: लंबे समय तक रखे हुए उबले पानी से अजीब गंध आने लगती है, जो खराब गुणवत्ता का संकेत है।
| क्या करें? | क्यों करें? |
| हमेशा ढक कर रखें | हवा के बैक्टीरिया और धूल से बचाने के लिए। |
| 24 घंटे के अंदर इस्तेमाल करें | पुरानी गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए। |
| कांच या स्टेनलेस स्टील का प्रयोग | प्लास्टिक के हानिकारक रसायनों से बचने के लिए। |
| ताजा ही उबालें | बार-बार उबालने से होने वाले केमिकल बदलाव रोकने के लिए। |
डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, पानी उबालने के बाद उसे ऐसे कंटेनर में रखें जिसका मुंह छोटा हो या जिसमें ढक्कन मजबूती से बंद होता हो। पानी निकालते समय उसमें सीधे हाथ या गंदा गिलास न डालें। यदि पानी का स्वाद बदल गया है, तो उसे तुरंत फेंक दें। याद रखें, स्वच्छता केवल पानी उबालने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे पीने तक बरकरार रहनी चाहिए।
उबला हुआ पानी पीना एक अच्छी आदत है, बशर्ते आप ऊपर बताई गई सावधानियों का पालन करें। आपकी एक छोटी सी सतर्कता आपको और आपके परिवार को पेट की गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।
