27 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज नेता और महाराष्ट्र के कद्दावर राजनीतिज्ञ छगन भुजबल के लिए आज का दिन कानूनी जीत का बड़ा संदेश लेकर आया है। बहुचर्चित महाराष्ट्र सदन घोटाले में छगन भुजबल को एक और बड़ी राहत मिली है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज मामले में पहले ही क्लीन चिट मिलने के बाद, अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी विशेष कोर्ट ने उन्हें ‘निर्दोष’ करार देते हुए डिस्चार्ज कर दिया है।

विशेष अदालत के इस फैसले के बाद भुजबल और उनके सहयोगियों पर लगे भ्रष्टाचार और काले धन को सफेद करने के गंभीर आरोप पूरी तरह से निराधार साबित हो गए हैं।

“कोई प्रेडिकेट ऑफेंस नहीं बनता” – कोर्ट का अहम फैसला

स्पेशल कोर्ट के जज सत्यनारायण नवंदर ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कानून के एक महत्वपूर्ण पहलू को रेखांकित किया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा:

  • मूल अपराध का अभाव: जब एसीबी (ACB) के मामले में ही आरोपियों को राहत मिल चुकी है और कोई ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ (Predicate Offence यानी मूल अपराध) ही नहीं बनता है, तो उसके आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
  • ED की कार्रवाई खारिज: प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत नियम है कि यदि मूल अपराध साबित नहीं होता, तो ईडी की जांच की कानूनी जमीन खत्म हो जाती है। इसी आधार पर कोर्ट ने भुजबल और अन्य आरोपियों की डिस्चार्ज अर्जी को मंजूर कर लिया।

क्या था महाराष्ट्र सदन घोटाला?

यह मामला दिल्ली में स्थित ‘महाराष्ट्र सदन’ की नई इमारत के निर्माण से जुड़ा था।

  1. आरोप: आरोप लगाया गया था कि जब छगन भुजबल राज्य के पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री थे, तब उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर ठेके दिए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और बदले में आर्थिक लाभ लिया गया।
  2. दोहरी जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले ACB ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था, और उसी आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस बनाया था।
  3. एसीबी की क्लीन चिट: कुछ समय पहले एसीबी की विशेष अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में भुजबल को बरी कर दिया था, जिसके बाद ईडी केस के गिरने की संभावनाएं बढ़ गई थीं।

छगन भुजबल केस: घटनाक्रम पर एक नजर

चरणविवरणस्थिति
ACB केसभ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का आरोपकोर्ट से डिस्चार्ज (बरी)
ED केस₹800 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपडिस्चार्ज अर्जी मंजूर (आज)
हिरासतभुजबल को इस मामले में जेल में भी रहना पड़ा थाफिलहाल पूरी तरह स्वतंत्र
वर्तमान स्थितिराजनीतिक रूप से मजबूत और आरोपों से मुक्तनिर्दोष घोषित

भुजबल के राजनीतिक करियर पर असर

छगन भुजबल के लिए यह फैसला उनके राजनीतिक भविष्य की दृष्टि से बेहद अहम है। पिछले कुछ वर्षों से वे और उनका परिवार इस घोटाले के आरोपों के साये में थे। इस दौरान उन्हें लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और जेल की सलाखों के पीछे भी समय बिताना पड़ा। अब जब दोनों ही प्रमुख जांच एजेंसियों के मामले खत्म हो गए हैं, तो भुजबल ने इसे ‘सच्चाई की जीत’ बताया है। इस राहत के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में उनका कद और भी मजबूत होने की संभावना है।

कोर्ट का यह फैसला भ्रष्टाचार के मामलों में ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ की अनिवार्यता को फिर से स्थापित करता है। छगन भुजबल के लिए यह न केवल कानूनी राहत है, बल्कि उनकी सामाजिक और राजनीतिक साख को बहाल करने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ भी है।

By News Scoop Desk

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