न्यूज स्कूप : छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे को लेकर वैचारिक युद्ध छिड़ गया है। राज्य के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा (Tank Ram Verma) द्वारा नाथूराम गोडसे को ‘राष्ट्रवादी’ बताने वाले बयान ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस बयान के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस हमलावर हो गई है और मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रही है।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) योजना का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ करने को लेकर पहले ही खींचतान चल रही है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी जानबूझकर गांधी जी की विरासत को धूमिल करने की कोशिश कर रही है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब बीजेपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। इसमें केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलने के फैसले का बचाव किया जा रहा था। इसी दौरान मंत्री टंकराम वर्मा ने नाथूराम गोडसे के संदर्भ में टिप्पणी कर दी।
- मंत्री का बयान: राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि “नाथूराम गोडसे एक राष्ट्रवादी व्यक्ति थे।” * कांग्रेस का पलटवार: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर इस बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे ‘गोडसेवादी मानसिकता’ करार देते हुए कहा कि महात्मा गांधी का नाम इतिहास से मिटाने की कोई भी कोशिश कभी सफल नहीं होगी।
| पक्ष | मुख्य आरोप/तर्क | मांग |
| कांग्रेस | बीजेपी की दोहरी नीति; विदेश में गांधी का सम्मान, देश में हत्यारे का गुणगान। | मंत्री टंकराम वर्मा का इस्तीफा। |
| बीजेपी (मंत्री) | गोडसे को राष्ट्रवादी बताया और योजना के नाम परिवर्तन का समर्थन किया। | फिलहाल आधिकारिक नेतृत्व मौन है। |
| विवाद का केंद्र | मनरेगा का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ करना और गोडसे का महिमामंडन। | गांधी बनाम गोडसे की वैचारिक जंग। |
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक तरफ पीएम मोदी वैश्विक मंचों पर खुद को गांधी के देश का प्रतिनिधि बताते हैं, वहीं उनके मंत्री खुलेआम गांधी जी के हत्यारे को राष्ट्रवादी बता रहे हैं।
शुक्ला ने सवाल उठाया कि क्या यह बीजेपी की आधिकारिक सोच है? उन्होंने इसे गांधी जी के सिद्धांतों का अपमान बताते हुए राज्यपाल से हस्तक्षेप करने और मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना और फिर उनके हत्यारे का महिमामंडन करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि बीजेपी सरकार गांधीवादी मूल्यों को खत्म कर कट्टरपंथी विचारधारा को थोपना चाहती है।
वर्तमान स्थिति: फिलहाल बीजेपी के प्रदेश या राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से इस विवादित बयान पर कोई स्पष्ट सफाई नहीं आई है। वहीं, कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से सदन तक ले जाने की तैयारी में है। छत्तीसगढ़ में इस बयान ने आने वाले समय में राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज होने के संकेत दे दिए हैं।
राष्ट्रपिता और उनके हत्यारे को लेकर छिड़ी यह बहस छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकती है। टंकराम वर्मा के इस बयान ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है।
