न्यूज स्कूप : बिहार की सियासत में एक बार फिर ‘भारत रत्न’ (Bharat Ratna) को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस मांग के बीच एनडीए (NDA) के अहम सहयोगी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान के ताजा बयान ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
शनिवार, 10 जनवरी 2026 को दिल्ली से पटना पहुंचे चिराग पासवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत रत्न जैसा गरिमामयी सम्मान किसी के मांगने या राजनीतिक सिफारिश से नहीं मिलता, बल्कि इसकी एक निर्धारित प्रक्रिया होती है।
जेडीयू नेता केसी त्यागी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग किए जाने पर चिराग ने प्रतिक्रिया दी।
- प्रक्रिया पर जोर: चिराग पासवान ने कहा, “भारत रत्न एक सर्वोच्च सम्मान है जो काफी जटिल और व्यवस्थित प्रक्रिया के बाद दिया जाता है। यह सम्मान किसी के चाहने या किसी राजनीतिक दल के मांग करने से नहीं मिलता।”
- नीतीश की तारीफ: हालांकि, चिराग ने संतुलन साधते हुए मुख्यमंत्री की तारीफ भी की। उन्होंने माना कि पिछले दो दशकों में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने विकास के पथ पर आगे बढ़ने का काम किया है और वे इस काबिलियत के अधिकारी हैं। लेकिन उन्होंने दोहराया कि चयन का आधार केवल योग्यता और संवैधानिक प्रक्रिया होनी चाहिए।
पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने आरजेडी (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर आरोप तय होने के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया।
- न्यायालय का सम्मान: चिराग ने कहा कि देश कानून से चलता है और मैं हमेशा कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करता हूँ।
- तथ्यों की बात: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कोर्ट ने आरोप तय किए हैं, तो निश्चित रूप से सामने कुछ ठोस तथ्य और सबूत रहे होंगे। बिना आधार के न्यायालय किसी पर दोष सिद्ध नहीं करता। अब आने वाला समय तय करेगा कि सजा क्या होगी, लेकिन यह साफ है कि कानून अपना काम कर रहा है।
नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग ऐसे समय में उठी है जब बिहार में चुनावी समीकरणों को लेकर भीतरखाने तैयारियां चल रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू इस मुद्दे के जरिए नीतीश कुमार की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर और बड़ा बनाना चाहती है, जबकि चिराग पासवान का बयान एनडीए के भीतर उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान और ‘समान दूरी’ की नीति को दर्शाता है।
चिराग पासवान के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भले ही वे एनडीए का हिस्सा हैं, लेकिन हर मुद्दे पर वे जेडीयू के सुर में सुर नहीं मिलाएंगे। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति किस करवट बैठती है।
