न्यूज स्कूप : बुधवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित संविधान दिवस समारोह में देश के शीर्ष कानूनी और राजनीतिक हस्तियों ने हिस्सा लिया। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने इस अवसर पर भारतीय संविधान के महत्व और विभिन्न संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में मॉरिशस, केन्या, नेपाल, श्रीलंका, मलेशिया और भूटान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश भी शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका और वकीलों के बीच के संबंध को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि “जब कोर्ट को संविधान का पहरेदार माना जाता है, तो बार के सदस्य मशाल उठाने वाले होते हैं।”
उन्होंने जोर दिया कि जब किसी कानून की संवैधानिकता पर फैसला सुनाने की आवश्यकता होती है, तब बार ही उनके सामने ऐसी बातें लाता है, जिससे वे कानून को बेहतर ढंग से समझ सकें और निष्पक्ष निर्णय ले सकें। सीजेआई ने बार से और भी गहरी जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने हरियाणा से पहले सीजेआई बनने पर कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल की बधाई भी स्वीकार की।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संविधान निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया को याद करते हुए कहा कि संविधान पर 165 दिनों से अधिक समय तक चर्चा और बहस हुई, जिसे डॉ. भीमराव आंबेडकर ने तैयार किया। उन्होंने बताया कि संविधान सभा ने पूरे भारत का प्रतिनिधित्व किया और इसने “अन्य देशों के संविधान की सर्वोत्तम बातों को लिया है और इसे अपने भारत के वातावरण के अनुरूप ढाला है।”
तुषार मेहता ने संवैधानिक संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि यहां किसी भी अंग का दूसरे पर वर्चस्व नहीं है। उन्होंने जोड़ा कि “जब भी कार्यपालिका और विधायिका ने संवैधानिक नैतिकता की सीमाओं को पार किया है, न्यायपालिका ने हस्तक्षेप किया है।” सॉलिसिटर जनरल ने सड़कों पर उतरे आम आदमी का शुक्रिया अदा किया, जिसने यह सुनिश्चित किया कि संविधान सदैव मार्गदर्शक प्रकाश बना रहे।
कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कार्यक्रम में कहा कि संविधान निर्माण की प्रक्रिया 9 दिसंबर 1946 को शुरू हुई, जिसमें सभी वर्गों और राजाओं के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने तब भी समाज में मौजूद आर्थिक और सामाजिक असमानता (गैप) की ओर ध्यान दिलाया था, जिसे अब नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार कम करने में लगी हुई है।
मेघवाल ने देश के विकास लक्ष्यों को रेखांकित करते हुए कहा, “आज भारत दुनिया में चौथे नंबर की अर्थव्यवस्था बन गया है। हम 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि इमरजेंसी के दौर में भी संविधान ने हमें दिशा दिखाई। कानून मंत्री ने आगाह किया कि अब हम इंडस्ट्री 4.0 के युग में प्रवेश कर गए हैं, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी कई नई चुनौतियां हैं, जिनपर विचार करने की जरूरत है।
