17 Mar 2026, Tue
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Delhi Blast 2025: मास्टरमाइंड डॉ. मुजम्मिल के संपर्क वाले अल फलाह यूनिवर्सिटी के 15 डॉक्टर लापता, कार में 3 घंटे में तैयार हुआ था बम?

News Scoop

न्यूज स्कूप : दिल्ली ब्लास्ट के मास्टरमाइंड माने जा रहे डॉक्टर मुजम्मिल को 9 नवंबर को गिरफ्तार किए जाने के बाद, जांच एजेंसियां इस पूरी साजिश की परतें खोलने में लगी हुई हैं। मुजम्मिल के पूरे नेटवर्क और सहयोगियों को पकड़ने के लिए देश भर में छापेमारी की जा रही है। इस बीच, जांच में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है: अल फलाह यूनिवर्सिटी के 15 डॉक्टर लापता हैं। यह वही डॉक्टर हैं जो मुजम्मिल के सीधे संपर्क में थे।

जांच एजेंसियां मुजम्मिल की कॉल डिटेल्स के आधार पर इन 15 डॉक्टरों को ढूंढ रही हैं, लेकिन उनका फोन लगातार बंद आ रहा है। जब जांच एजेंसियां पूछताछ के लिए सीधे अल फलाह यूनिवर्सिटी पहुंचीं, तो यह डॉक्टर गायब मिले। इन डॉक्टरों का रहस्यमय तरीके से गायब मिलना कई तरह के सवाल उठा रहा है, जिनकी तलाश में जाँच एजेंसियाँ देशभर में जुटी हुई हैं।

क्या पार्किंग में 3 घंटे में तैयार हुआ था बम?

जैसे-जैसे दिल्ली ब्लास्ट की जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई अनसुलझे रहस्य सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों की एक बड़ी चिंता यह भी है कि क्या दिल्ली कार धमाके में पार्किंग के भीतर ही 3 घंटे में कार में बम तैयार किया गया था। कार में धमाके के कई पेंच अभी भी अनसुलझे हैं, जो एजेंसियों को इसी तरफ इशारा कर रहे हैं।

डेटोनेटर और टाइमर का रहस्य

सूत्रों के मुताबिक, जिस हाई इंटेंसिटी ब्लास्ट को अंजाम दिया गया, उसमें मौके से न टाइमर मिला और न ही डेटोनेटर के अंश। लेकिन एजेंसियां जानती हैं कि इतना बड़ा धमाका डेटोनेटर के बिना नहीं हो सकता था। इसी कारण, जाँच एजेंसियां पिछले पाँच दिनों से धमाके की जगह यानी लाल किले के आसपास डेटोनेटर या इलेक्ट्रिक वायर जैसी बारीक चीजें तलाश रही हैं।

अमोनियम नाइट्रेट और प्रेशर का सिद्धांत

जाँच एजेंसियों को शक है कि आतंकी उमर ने पार्किंग में खड़ी गाड़ी के अंदर ही एक ऐसा बम तैयार किया था जो हाई इंटेंसिटी का हो और ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सके। दरअसल, कुछ ऐसे नमूने स्पॉट से मिले हैं जो अमोनियम नाइट्रेट के होने की तरफ इशारा कर रहे हैं।

एजेंसियों का मानना है कि अगर धमाके से पहले अमोनियम नाइट्रेट और उसमें केमिकल ऑयल को बंद गाड़ी में रखा जाएगा, तो उसमें गर्मी बढ़ती जाएगी। बंद जगह होने के कारण वह दबाव (Pressure) सहन नहीं कर सकता है। इसलिए, 3 घंटे का समय इस अत्यधिक दबाव को बनाने के लिए लिया गया हो सकता है।

हालांकि, इस दबाव को ट्रिगर करके ब्लास्ट करने के लिए डिटेक्टर होना जरूरी है, तभी एजेंसियां इस धमाके की गुत्थी सुलझाने के लिए लाल किले के आसपास एविडेंस इकट्ठा करने में जुटी हुई हैं।

By News Scoop Desk

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