न्यूज स्कूप : कॉर्पोरेट जगत में अक्सर काम के दबाव और बॉस के साथ तनातनी की खबरें सुर्खियां बनती हैं, लेकिन दिल्ली के एक उभरते हुए स्टार्टअप ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसने ‘एम्प्लॉई-बॉस’ के रिश्ते की एक नई और प्रेरणादायक परिभाषा लिखी है। दिल्ली स्थित इंडियन स्ट्रीटवियर लेबल Bluorng के संस्थापकों ने अपने पहले कर्मचारी की सालों की मेहनत और वफादारी का ऐसा सम्मान किया, जिसकी चर्चा आज पूरे देश में हो रही है।
कंपनी के फाउंडर्स सिद्धांत सभरवाल और मोकम सिंह ने एक कैजुअल हाउस पार्टी के दौरान अपने पहले कर्मचारी, राहुल ओझा को एक नई चमचमाती महिंद्रा BE 6 (Mahindra BE 6) इलेक्ट्रिक SUV तोहफे में देकर सबको चौंका दिया।
यह पूरा वाकया एक टीम गेट-टुगेदर के दौरान हुआ। पार्टी में माहौल काफी हल्का-फुल्का था, जब सिद्धांत और मोकम ने अपनी कंपनी के शुरुआती दिनों और संघर्षों को याद करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक स्टार्टअप को सफल बनाने के लिए सिर्फ स्किल्स (Skills) काफी नहीं होतीं, बल्कि ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो कंपनी के लिए एक मजबूत दीवार और पिलर की तरह खड़े रह सकें।
इसी दौरान उन्होंने राहुल ओझा का नाम लिया। सिद्धांत ने राहुल की तारीफ करते हुए कहा, “हमारे साथ काम करना बहुत मुश्किल है। मैंने राहुल को काम के सिलसिले में बहुत परेशान किया है, लेकिन हर उतार-चढ़ाव में वह हमारे साथ मजबूती से डटा रहा।”
जैसे ही सिद्धांत ने राहुल की वफादारी की सराहना पूरी की, उन्होंने एक ऐसा वाक्य कहा जिसने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। सिद्धांत ने मुस्कुराते हुए राहुल से कहा, “राहुल, कल से मेट्रो को भूल जाओ” और इतना कहते ही उन्होंने राहुल के हाथ में नई SUV की चाबी थमा दी।
यह सुनते ही पूरा कमरा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राहुल, जो अब तक केवल एक साधारण चर्चा का हिस्सा थे, अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पा रहे थे। टीम के बाकी सदस्यों ने उन्हें गले लगाकर बधाई दी।
चाबी मिलने के बाद पूरी टीम बिल्डिंग के बाहर पहुंची, जहां लाल सैटिन की चादर से ढकी एक कार खड़ी थी। जैसे ही कवर हटाया गया, वहां नई महिंद्रा BE 6 खड़ी नजर आई। राहुल ने भावुक होते हुए ड्राइवर सीट संभाली और अपनी नई कार की पहली सवारी का आनंद लिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल राहुल के लिए एक बड़ा इनाम है, बल्कि यह स्टार्टअप कल्चर में एक सकारात्मक संदेश भी भेजता है कि जो कर्मचारी कंपनी के विजन में भरोसा रखते हैं, उनकी मेहनत का फल मीठा होता है।
आज के दौर में जहां कंपनियां ‘ले-ऑफ’ और ‘कॉस्ट कटिंग’ की बात करती हैं, वहीं Bluorng जैसे स्टार्टअप्स यह दिखा रहे हैं कि कर्मचारी केवल ‘वर्कफोर्स’ नहीं बल्कि परिवार का हिस्सा होते हैं। राहुल ओझा को मिला यह तोहफा केवल एक कार नहीं, बल्कि उस भरोसे और समर्पण का सम्मान है जो उन्होंने कंपनी की नींव रखते समय दिखाया था।
दिल्ली के इस स्टार्टअप की कहानी ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है। यह साबित करता है कि अगर इंसान दिल लगाकर काम करे और नेतृत्व (Leadership) उदार हो, तो सफलता का स्वाद पूरी टीम मिलकर चखती है।
