न्यूज स्कूप : उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी और अवैध सिंडिकेट से जुड़े एक बड़े मामले में नाम सामने आने के बाद जौनपुर के प्रभावशाली नेता और पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी त्वरित सफाई पेश की है। उन्होंने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से राजनीतिक साजिश करार दिया है और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है।
धनंजय सिंह ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से लगातार पोस्ट करते हुए अपने राजनीतिक विरोधियों पर तीखा हमला बोला।
धनंजय सिंह ने अपने बयान में दावा किया कि उनके राजनीतिक विरोधी जानबूझकर भ्रामक और झूठी खबरें फैला रहे हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को विपक्षी दलों द्वारा प्रायोजित बताया।
पूर्व सांसद ने लिखा:
“मेरे राजनीतिक विरोधी मेरे बारे में तरह-तरह की भ्रामक बातें और झूठी खबरें फैला रहे हैं। यह पूरा प्रकरण वाराणसी से जुड़ा हुआ है, इसलिए कांग्रेस और कुछ विपक्षी दल माननीय प्रधानमंत्री जी की छवि धूमिल करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। मैं केंद्र और राज्य सरकार से मांग करता हूं कि इस मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जाए, ताकि असली दोषी सलाखों के पीछे पहुंचे और मेरे खिलाफ चल रही अनर्गल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति पर विराम लगे।”
उन्होंने आगे चेतावनी दी कि जो लोग उनके नाम का इस्तेमाल कर ‘राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं’, उन्हें जल्द ही जनता और कानून दोनों के सामने जवाब देना पड़ेगा।
यह पूरा मामला पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में है, जब उत्तर प्रदेश पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग की संयुक्त टीम ने प्रतिबंधित कोडीन आधारित कफ सिरप की अवैध सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए बड़े स्तर पर छापेमारी की थी। कोडीन सिरप का उपयोग नशे के लिए किया जाता है, और इसकी अवैध बिक्री एक गंभीर अपराध है।
इस कार्रवाई में कई बड़े नाम सामने आए हैं और सोशल मीडिया एवं स्थानीय मीडिया में धनंजय सिंह का नाम भी इस सिंडिकेट से जोड़ा जा रहा है, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर राजनीतिक द्वेष की संज्ञा देते हुए खारिज कर दिया है।
धनंजय सिंह लंबे समय से जौनपुर और पूर्वांचल की राजनीति में एक प्रभावशाली और कद्दावर व्यक्ति रहे हैं। उन्होंने 2014 में जौनपुर लोकसभा सीट से बसपा के टिकट पर सांसद चुने जाने के बाद विभिन्न दलों से दूरी बनाई और एक निर्दलीय ताकत के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित की।
वर्तमान में वह 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं, ऐसे में इस गंभीर मामले में उनका नाम आना निश्चित रूप से उनकी चुनावी तैयारियों और राजनीतिक साख को प्रभावित कर सकता है। उनकी यह CBI जांच की मांग अब सरकार के पाले में है। यह देखना बाकी है कि केंद्र और राज्य सरकारें उनकी मांग पर क्या रुख अपनाती हैं और यह मामला पूर्वांचल की सियासत में किस हद तक तूल पकड़ता है।
