न्यूज स्कूप : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (Bhojshala) परिसर में पूजा और नमाज को लेकर वर्षों पुराना विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुँच गया है। इस साल बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) और शुक्रवार का दिन एक ही तारीख को पड़ने के कारण टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ नामक संस्था ने याचिका दाखिल कर मांग की है कि बसंत पंचमी के दिन मुसलमानों को वहां नमाज पढ़ने से रोका जाए।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस मामले को अर्जेंट हियरिंग के लिए रखा गया, जिस पर कोर्ट ने गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
इस साल बसंत पंचमी का पावन पर्व शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।
- ASI का मौजूदा नियम: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति है। वहीं, मुस्लिमों को हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।
- याचिका का तर्क: अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया है कि जब बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन होते हैं, तो ASI का आदेश स्पष्ट नहीं है। पूजा और नमाज एक साथ होने से सांप्रदायिक तनाव और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
याचिकाकर्ता ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा है कि:
- 11वीं सदी का निर्माण: भोजशाला का निर्माण परमार वंश के राजा भोज ने मां वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर के रूप में कराया था।
- धार्मिक स्वरूप: याचिका में आरोप लगाया गया है कि ASI ने स्मारक का धार्मिक स्वरूप तय किए बिना ही नमाज की अनुमति दी है, जो ‘प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल अधिनियम’ (AMASR Act) के खिलाफ है।
- पवित्रता का तर्क: बसंत पंचमी सनातन धर्म के लिए अत्यंत पवित्र दिन है, इसलिए उस दिन परिसर का उपयोग केवल पूजा के लिए ही होना चाहिए।
| पक्ष | निर्धारित दिन/समय | धार्मिक गतिविधि |
| हिंदू पक्ष | हर मंगलवार और बसंत पंचमी | सरस्वती पूजा और दर्शन |
| मुस्लिम पक्ष | हर शुक्रवार (दोपहर 1 से 3 बजे) | जुमे की नमाज |
| विवादित तिथि | 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) | बसंत पंचमी और जुमा एक साथ |
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह 23 जनवरी को नमाज पर रोक लगाने का आदेश दे। साथ ही, स्थानीय प्रशासन और ASI को कड़े सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दे ताकि शांति भंग न हो। धार जिला प्रशासन भी इस स्थिति को देखते हुए अलर्ट पर है, क्योंकि पहले भी ऐसे संयोगों पर तनाव देखा गया है।
अब सभी की नजरें 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि 23 जनवरी को भोजशाला की व्यवस्था क्या होगी। क्या सदियों पुरानी परंपरा और आधुनिक सुरक्षा चिंताओं के बीच कोई बीच का रास्ता निकलेगा, यह देखने वाली बात होगी।
