न्यूज स्कूप : दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने इंजीनियरिंग और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो पहले कभी नहीं हुआ। दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली मेट्रो ने अपनी सबसे व्यस्त लाइनों में से एक, रेड लाइन (Red Line) के ऊंचे खंभों पर चल रहे ट्रैक के ठीक नीचे नई सुरंग खोद डाली, लेकिन इस दौरान ऊपर दौड़ रही ट्रेनों को एक पल के लिए भी नहीं रोका गया। रेड लाइन पर प्रतिदिन लगभग सात लाख लोग सफर करते हैं।
यह चुनौतीपूर्ण कार्य दिल्ली मेट्रो के फेज-4 विस्तार परियोजना के तहत पुलबंगश (Pulbangash) के पास अंजाम दिया गया, जिसने भारतीय इंजीनियरिंग की कुशलता का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।
यह स्थान DMRC के लिए सबसे मुश्किल चुनौतियों में से एक था। ऊपर मेट्रो का ट्रैक ऊंचे-ऊंचे खंभों (वायडक्ट पिलर) पर टिका हुआ है। अगर नीचे सुरंग खोदते समय ज़मीन जरा भी धंसती या हिलती, तो ऊपर का पूरा ट्रैक अस्थिर हो जाता और एक बड़ा हादसा हो सकता था।
इस खतरे से बचने के लिए, DMRC के इंजीनियरों ने अत्याधुनिक तकनीक और सावधानी का इस्तेमाल किया:
- मिट्टी को बनाया चट्टान: सबसे पहले ऊपर वाले खंभों के आसपास की कमजोर मिट्टी को पक्का किया गया। इसके लिए पिलरों के चारों ओर लगभग 180 छेद किए गए। इन छेदों में विशेष और मजबूत सीमेंट (Grouting) डालकर मिट्टी को चट्टान जैसा ठोस बना दिया गया, ताकि नीचे टनेलिंग बोरिंग मशीन (TBM) चलाने से भी ज़मीन न बैठे।
- 24 घंटे की निगरानी: सुरक्षा के लिए हर पल बारीकी से नज़र रखी गई। तरह-तरह के मीटर और मशीनें लगाई गईं जो लगातार यह बताती रहती थीं कि कहीं ज़मीन धंसी तो नहीं या खंभा थोड़ा भी टेढ़ा तो नहीं हुआ। इंजीनियर 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात थे।
इस अभूतपूर्व सतर्कता का ही नतीजा रहा कि सब कुछ एकदम परफेक्ट रहा और लाखों यात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
DMRC के बड़े अधिकारी और एडिशनल सीपी/स्पेशल सेल अनुज दयाल ने इस सफलता पर जोर देते हुए कहा, “रेड लाइन पर एक मिनट की रुकावट भी लाखों लोगों को भारी परेशानी में डाल देती। हमने अत्याधुनिक तकनीक और समर्पण के साथ यह सुनिश्चित किया कि वो स्थिति न आए।”
फिलहाल इस नए प्रोजेक्ट की एक तरफ की सुरंग पूरी हो गई है, और दूसरी तरफ सुरंग खोदने का काम भी जोर-शोर से चल रहा है। दिल्ली मेट्रो के फेज-4 विस्तार के पूरा होने के बाद, दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क 520 किलोमीटर से ज्यादा लंबा हो जाएगा। यह विस्तार दिल्ली-एनसीआर के आम आदमी के लिए घर से ऑफिस, बाज़ार, स्कूल जाने के रास्ते को और आसान और तेज बना देगा।
