न्यूज स्कूप : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दूसरे कार्यकाल के पहले एक साल ने पूरी दुनिया की भू-राजनीति (Geopolitics) को हिलाकर रख दिया है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ नाटकीय सैन्य हस्तक्षेप के बाद, अब ट्रंप की सीधी नजर ईरान पर है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वह परमाणु हथियारों के मुद्दे पर बातचीत की मेज पर नहीं आता है, तो उसे इतिहास की सबसे भीषण सैन्य कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है।
ट्रंप ने खुलासा किया कि अमेरिका का एक विशालकाय नौसैनिक बेड़ा, जिसका नेतृत्व विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन कर रहा है, ईरान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ट्रंप के मुताबिक, यह बेड़ा उस ताकत से भी कहीं अधिक बड़ा है जिसे वेनेजुएला मिशन के लिए तैनात किया गया था।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया है कि उनके पास समझौते के लिए बहुत कम समय बचा है। ट्रंप ने कहा:
- विशाल नौसैनिक बेड़ा: “ईरान की ओर बढ़ रहा यह बेड़ा पूरी ताकत और स्पष्ट उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रहा है। यह किसी भी मिशन को अत्यंत तेजी और सटीकता के साथ अंजाम देने में संकोच नहीं करेगा।”
- समझौते की शर्त: ट्रंप चाहते हैं कि ईरान एक न्यायपूर्ण और संतुलित समझौते पर हस्ताक्षर करे, जिसमें परमाणु हथियारों के विकास पर पूर्ण प्रतिबंध हो।
- सीधी चेतावनी: “मैंने पहले भी कहा था कि डील कर लो, लेकिन उन्होंने नहीं सुनी। अब हालात निर्णायक मोड़ पर हैं।”
ट्रंप ने अपने संबोधन में पिछले साल जून (2025) में हुए ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ का जिक्र कर ईरान को डराया। यह ऑपरेशन आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे खतरनाक हमलों में से एक माना जाता है।
- महज 25 मिनट में तबाही: अमेरिकी वायुसेना ने मात्र 25 मिनट के भीतर ईरान के तीन सबसे प्रमुख परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतांज और इस्फाहान को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया था।
- स्टील्थ तकनीक का प्रहार: इस हमले में 7 स्टील्थ B-2 बॉम्बर्स और 125 से ज्यादा विमान शामिल थे। 12 भारी बमों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की कमर तोड़ दी थी।
- अगला हमला होगा विनाशकारी: ट्रंप ने कहा कि अगला हमला ‘मिडनाइट हैमर’ से भी कहीं अधिक विनाशकारी होगा।
| घटनाक्रम | विवरण | प्रभाव |
| जून 2025 | ऑपरेशन मिडनाइट हैमर | 3 परमाणु ठिकाने नष्ट |
| जनवरी 2026 | वेनेजुएला हस्तक्षेप | मादुरो सरकार पर बड़ी कार्रवाई |
| वर्तमान (2026) | अब्राहम लिंकन बेड़ा | ईरान की घेराबंदी शुरू |
| ट्रंप की मांग | नो न्यूक्लियर डील | ईरान का आर्थिक और सैन्य आत्मसमर्पण |
ट्रंप के इस कड़े रुख से वैश्विक तेल बाजारों में उथल-पुथल मचने की आशंका है। यदि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनती है, तो कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर जा सकती हैं। हालांकि, ट्रंप का मानना है कि उनकी “ताकत के जरिए शांति” (Peace through Strength) की नीति ही ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगी।
डोनाल्ड ट्रंप की यह चेतावनी केवल शब्द नहीं हैं, क्योंकि वेनेजुएला की हालिया घटनाओं ने साबित किया है कि वे जो कहते हैं, उसे कर दिखाते हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या वह बातचीत का रास्ता चुनेगा या एक और विनाशकारी हमले का सामना करेगा?
