न्यूज स्कूप : स्मार्टफोन को मोबाइल नेटवर्क से जोड़ने का तरीका अब धीरे-धीरे पारंपरिक प्लास्टिक सिम कार्ड से आगे निकल रहा है। इस डिजिटल बदलाव के केंद्र में है e-SIM (एम्बेडेड सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल)। आजकल कई नए और प्रीमियम स्मार्टफोन e-SIM तकनीक को सपोर्ट करने लगे हैं, जिससे यूजर्स के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि e-SIM आखिर है क्या और यह आम फिजिकल सिम कार्ड से कितनी अलग है।
e-SIM एक तरह की वर्चुअल (Virtual) सिम होती है जो फिजिकल प्लास्टिक कार्ड के बजाय सीधे आपके फोन, स्मार्टवॉच या टैबलेट के अंदर ही चिप के रूप में लगी रहती है (Embedded)।
- इसमें बाहर से कोई सिम कार्ड डालने या निकालने की जरूरत नहीं होती।
- टेलीकॉम कंपनी इसे पूरी तरह से डिजिटल तरीके से एक्टिवेट करती है, जो एक सुरक्षित प्रोसेस होता है।
e-SIM को डिवाइस की सेटिंग्स के जरिए ही चालू किया जाता है। आपको सिम ट्रे खोलने या पिन निकालने की झंझट नहीं रहती।
- सक्रियण: एक बार एक्टिव होने के बाद, यह बिल्कुल सामान्य फिजिकल सिम की तरह कॉल, मैसेज और मोबाइल डेटा की सुविधा देती है।
- डिवाइस स्पेस: चूंकि यह फोन के अंदर फिट होती है, इसलिए यह स्मार्टफोन कंपनियों को डिवाइस के अंदर ज्यादा जगह उपलब्ध कराती है, जिसका उपयोग वे बड़ी बैटरी या अन्य हार्डवेयर फीचर्स के लिए कर सकती हैं।
- भारत में सपोर्ट: भारत में Jio, Airtel और Vodafone-Idea (Vi) जैसी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां पहले से ही e-SIM सपोर्ट प्रदान करती हैं।
e-SIM के उपयोग से यूजर्स को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं:
- सुविधा और स्पीड: नेटवर्क बदलने के लिए अब सिम कार्ड निकालने या दुकान जाने की जरूरत नहीं पड़ती। सब कुछ डिजिटल तरीके से तुरंत हो जाता है।
- मल्टीपल प्रोफाइल: कई फोन एक साथ कई e-SIM प्रोफाइल सेव करने की सुविधा देते हैं, जिससे यात्रा के दौरान या नेटवर्क कमजोर होने पर आसानी से नेटवर्क स्विच किया जा सकता है।
- सुरक्षा: सिम खोने, चोरी होने या खराब होने का डर खत्म हो जाता है, क्योंकि सिम फोन के अंदर ही रहती है।
- वॉटर रेजिस्टेंस: सिम ट्रे न होने से फोन ज्यादा डस्ट और वॉटर रेजिस्टेंट (IP रेटिंग) बन पाते हैं।
जहां e-SIM सुविधाजनक है, वहीं इसकी कुछ व्यावहारिक सीमाएं भी हैं:
- ट्रांसफर की समस्या: अगर आपका फिजिकल सिम वाला फोन खराब हो जाए, तो आप तुरंत सिम निकालकर दूसरे फोन में डाल सकते हैं। e-SIM के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता।
- री-एक्टिवेशन: फोन खराब होने की स्थिति में आपको टेलीकॉम कंपनी के जरिए नंबर दोबारा एक्टिवेट कराना पड़ता है, जिसमें कभी-कभी तुरंत समय लग सकता है।
- प्राइवेसी चिंता: कुछ यूजर्स को यह डर होता है कि सॉफ्टवेयर आधारित सिम होने के कारण प्राइवेसी से जुड़े सवाल उठ सकते हैं।
सुरक्षा के लिहाज से e-SIM और फिजिकल सिम लगभग बराबर मानी जाती हैं।
- 3G, 4G और 5G नेटवर्क आमतौर पर पब्लिक Wi-Fi की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होते हैं।
- मोबाइल नेटवर्क पर भेजा जाने वाला डेटा एन्क्रिप्टेड (Encrypted) होता है जिसे हैक करना आसान नहीं होता। इसलिए e-SIM इस्तेमाल करने से फोन की सुरक्षा पर कोई अतिरिक्त खतरा नहीं बढ़ता।
e-SIM और फिजिकल सिम में से कौन बेहतर है, यह पूरी तरह आपकी जरूरतों पर निर्भर करता है:
- e-SIM चुनें: यदि आप आसान सेटअप, जल्दी नेटवर्क बदलने, बेहतर फोन डिजाइन और वॉटर रेजिस्टेंस को प्राथमिकता देते हैं।
- फिजिकल सिम चुनें: यदि आप सादगी, हर जगह उपलब्धता और तुरंत सिम बदलने की सुविधा चाहते हैं।
दोनों ही स्थितियों में, डेटा और नेटवर्क सेटिंग्स का बैकअप रखना एक समझदारी भरा कदम है।
