20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp की प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बार हमला किसी साधारण यूजर ने नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और टेस्ला के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) और टेलीग्राम (Telegram) के सीईओ पावेल दुरोव (Pavel Durov) ने किया है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक कोर्ट में मेटा (Meta) के खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ मुकदमा दर्ज किया गया है। इन टेक दिग्गजों का दावा है कि व्हाट्सएप उतना सुरक्षित नहीं है जितना वह विज्ञापनों में दावा करता है।

एलन मस्क: “व्हाट्सएप बिल्कुल सुरक्षित नहीं”

एलन मस्क लंबे समय से व्हाट्सएप की प्राइवेसी नीतियों के आलोचक रहे हैं। व्हिसलब्लोअर द्वारा लगाए गए ताजा आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने स्पष्ट कहा कि व्हाट्सएप पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

  • X Chat को बताया बेहतर: मस्क ने न केवल व्हाट्सएप बल्कि Signal जैसे ऐप्स पर भी संदेह जताया। उन्होंने अपने प्लेटफॉर्म ‘X’ के अपकमिंग फीचर X Chat को एक सुरक्षित और बेहतर विकल्प के रूप में पेश किया है।
  • मस्क के इस बयान ने सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल प्राइवेसी’ की नई लहर पैदा कर दी है।

पावेल दुरोव: “2026 में भी व्हाट्सएप को सुरक्षित मानना भूल है”

टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव ने व्हाट्सएप के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) सिस्टम पर सीधा हमला बोला है।

  • एनालिसिस का दावा: दुरोव ने दावा किया कि टेलीग्राम की टीम ने व्हाट्सएप के एन्क्रिप्शन का तकनीकी विश्लेषण किया है, जिसमें कई ‘अटैक वेक्टर्स’ (कमियां) पाए गए हैं।
  • तीखा बयान: उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा, “अगर 2026 में भी कोई व्हाट्सएप को सुरक्षित मानता है, तो वह वास्तविकता को नजरअंदाज कर रहा है।” दुरोव के अनुसार, व्हाट्सएप के बैकडोर एक्सेस के जरिए डेटा चोरी होना मुमकिन है।

क्या है अमेरिका में दर्ज मुकदमा?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के खिलाफ दर्ज मुकदमे में चौंकाने वाले दावे किए गए हैं:

  1. झूठा भरोसा: याचिका में आरोप है कि व्हाट्सएप ने यह कहकर यूजर्स को गुमराह किया कि मेटा भी उनके मैसेज नहीं पढ़ सकता।
  2. डेटा स्टोरेज: याचिका का दावा है कि मेटा यूजर्स के मैसेज को स्टोर करता है, उनका एनालिसिस करता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें एक्सेस भी कर सकता है।
  3. ग्लोबल इम्पैक्ट: इस मुकदमे में भारत समेत कई देशों के यूजर्स के प्रभावित होने की बात कही गई है।

मेटा और व्हाट्सएप का पलटवार

मेटा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक और सुर्खियां बटोरने वाला बताया है।

  • मजबूत एन्क्रिप्शन: व्हाट्सएप प्रमुख विल कैथकार्ट (Will Cathcart) ने कहा कि पिछले एक दशक से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन ही व्हाट्सएप की पहचान है।
  • यूजर के पास चाबी: उन्होंने स्पष्ट किया कि मैसेज की ‘एन्क्रिप्शन-की’ केवल यूजर के फोन में होती है, कंपनी के पास नहीं। मेटा ने मस्क और दुरोव के बयानों को अपने-अपने ऐप्स को प्रमोट करने की एक ‘मार्केटिंग रणनीति’ करार दिया है।

प्राइवेसी की जंग: प्रमुख दावे

प्लेटफॉर्मएलन मस्क/दुरोव का दावाव्हाट्सएप का जवाब
सुरक्षाबैकडोर एक्सेस और डेटा एनालिसिस संभव100% एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड
भरोसाकंपनी मैसेज पढ़ सकती हैमैसेज सिर्फ सेंडर और रिसीवर पढ़ सकते हैं
विकल्पX Chat और Telegram बेहतरअरबों यूजर्स का सबसे भरोसेमंद ऐप

डिजिटल दुनिया में ‘प्राइवेसी’ की यह बहस अब अदालतों तक पहुँच चुकी है। एक तरफ करोड़ों यूजर्स की सुविधा है, तो दूसरी तरफ डेटा सुरक्षा के गंभीर सवाल। जब तक अमेरिका की अदालत इस पर कोई फैसला नहीं देती, तब तक यूजर्स के बीच यह असमंजस बना रहेगा कि क्या उनका ‘पर्सनल मैसेज’ वास्तव में पर्सनल है।

By News Scoop Desk

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