न्यूज स्कूप : सुरक्षित निवेश के सबसे भरोसेमंद विकल्प सोने (Gold) ने भारतीय बाजार में एक बार फिर नया इतिहास रच दिया है। भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की रिकॉर्ड गिरावट और शेयर बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों का भरोसा सोने पर और अधिक मजबूत हुआ है। शुक्रवार तक 24 कैरेट सोने की कीमतें 1.6 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गई हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमतों में गिरावट के कोई संकेत नहीं हैं। इसके विपरीत, वैश्विक ब्रोकरेज फर्में आने वाले समय में सोने की चमक और बढ़ने का अनुमान लगा रही हैं।
आज यानी 24 जनवरी 2026 को 24 कैरेट सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया:
- आज का भाव: 24 कैरेट सोने की कीमत 15,862 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गई है।
- प्रति 10 ग्राम: 10 ग्राम सोने का भाव बढ़कर 1,58,620 रुपये हो गया है, जो कल के ₹1,57,150 के मुकाबले ₹1,470 की बड़ी बढ़त है।
- सालाना प्रदर्शन: पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने की कीमतों में लगभग 93% की अद्भुत वृद्धि दर्ज की गई है।
सोने की कीमतों में इस ‘रॉकेट’ जैसी रफ्तार के पीछे कई महत्वपूर्ण वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं:
- भू-राजनीतिक तनाव: ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव ने निवेशकों को डरा दिया है, जिससे वे सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven) के रूप में सोना खरीद रहे हैं।
- रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरना सोने को घरेलू बाजार में महंगा बना रहा है।
- कॉर्पोरेट नतीजे: रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) जैसी दिग्गज कंपनियों के निराशाजनक तिमाही नतीजों ने शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ाई है, जिसका पैसा अब सोने की तरफ मुड़ रहा है।
- सेंट्रल बैंक की खरीदारी: उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपनी रिजर्व एसेट्स में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं।
दिग्गज ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने सोने की कीमतों पर अपनी नई रिपोर्ट जारी की है, जो निवेशकों के चेहरे पर चमक ला सकती है।
- नया टारगेट: गोल्डमैन सैक्स ने साल 2026 के अंत तक सोने का टारगेट प्राइस बढ़ाकर 5400 डॉलर प्रति औंस कर दिया है।
- भारतीय मुद्रा में असर: भारतीय बाजार के लिहाज से यह भाव लगभग ₹1,75,160 प्रति 10 ग्राम बैठता है।
- अनुमान में वृद्धि: इससे पहले फर्म ने 4900 डॉलर (लगभग ₹1.59 लाख) का लक्ष्य रखा था, लेकिन मांग में ‘स्ट्रक्चरल बदलाव’ को देखते हुए इसे बढ़ा दिया गया है।
भले ही 23 जनवरी को गोल्ड ईटीएफ (ETFs) में मामूली गिरावट देखी गई थी, लेकिन वह महज एक अस्थायी मुनाफावसूली थी। आज भाव फिर से 17% तक उछल गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से निजी निवेशक और केंद्रीय बैंक सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं, वह इसके लंबी अवधि के बुलिश ट्रेंड (Bullish Trend) की पुष्टि करता है।
यदि आप सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह ध्यान रखना जरूरी है कि सोना अब केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक मजबूत वित्तीय कवच बन चुका है। गोल्डमैन सैक्स की भविष्यवाणी सच हुई तो अगले दो सालों में निवेशकों को बंपर रिटर्न मिल सकता है।
