न्यूज स्कूप : साल 2026 की शुरुआत भारतीय सर्राफा बाजार के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। पिछले काफी समय से रिकॉर्ड ऊंचाई को छू रहे सोने और चांदी (Gold & Silver) की कीमतों में साल के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को हल्की गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई सुस्ती और निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली ने घरेलू बाजार में पीली धातु के दामों को नीचे धकेला है।
जहाँ अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का हाजिर भाव घटकर 4,308.30 रुपये प्रति 10 ग्राम (विदेशी मुद्रा समायोजन के अनुसार) पर आ गया है, वहीं घरेलू बाजारों में भी ग्राहकों के लिए खरीदारी का मौका बना है।
1 जनवरी को देश के महानगरों में सोने की कीमतें इस प्रकार दर्ज की गई हैं:
| शहर | 24 कैरेट (शुद्ध सोना) | 22 कैरेट (ज्वेलरी के लिए) |
| दिल्ली | ₹1,35,030 | ₹1,23,790 |
| मुंबई | ₹1,34,880 | ₹1,23,640 |
| कोलकाता | ₹1,34,880 | ₹1,23,640 |
| चेन्नई | ₹1,34,880 | ₹1,23,640 |
| हैदराबाद | ₹1,34,880 | ₹1,23,640 |
सोने के साथ-साथ चांदी की चमक भी आज थोड़ी फीकी रही है। चांदी का भाव आज घटकर 2,38,900 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। हालांकि, यदि पिछले एक साल (2025) के प्रदर्शन को देखें, तो चांदी निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प रही है।
- चांदी का रिटर्न: पिछले साल चांदी ने लगभग 170 प्रतिशत का ऐतिहासिक रिटर्न दिया।
- सोने का रिटर्न: सोने ने निवेशकों को करीब 70 प्रतिशत का मुनाफा कराया।
- तांबा: औद्योगिक धातु तांबे ने भी 35 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की।
सोने और चांदी की कीमतों में दैनिक बदलाव के पीछे कई वैश्विक और स्थानीय कारण होते हैं:
- डॉलर बनाम रुपया: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना डॉलर में खरीदा जाता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो भारत जैसे देशों के लिए आयात महंगा हो जाता है, जिससे घरेलू कीमतें बढ़ जाती हैं।
- टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी: भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से मंगाता है। सरकार द्वारा लगाई जाने वाली इंपोर्ट ड्यूटी और जीएसटी (GST) कीमतों को सीधे प्रभावित करते हैं।
- सुरक्षित निवेश (Safe Haven): जब भी दुनिया में युद्ध (Geopolitical Tension) या आर्थिक मंदी की आहट होती है, तो लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में निवेश करते हैं, जिससे मांग बढ़ने पर कीमतें आसमान छूने लगती हैं।
साल के पहले दिन कीमतों में आई यह गिरावट उन लोगों के लिए शुभ संकेत है जो शादी-ब्याह के सीजन के लिए ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की चाल और वैश्विक बाजार के संकेतों पर ही आगे की कीमतें निर्भर करेंगी।
