20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : साध्वी यौन शोषण और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड जैसे गंभीर मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर बड़ी राहत मिली है। जेल प्रशासन और हरियाणा सरकार की ओर से राम रहीम को 40 दिनों की पैरोल मंजूर कर दी गई है। वर्तमान में रोहतक की सुनारिया जिला कारागार में बंद राम रहीम इस अवधि के दौरान हरियाणा के सिरसा स्थित अपने मुख्य डेरे में समय बिताएगा।

यह पहली बार नहीं है जब राम रहीम को जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है। अगस्त 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से वह कई बार पैरोल और फरलो (Furlough) पर बाहर आ चुका है, जिसे लेकर अक्सर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ जाती है।

कल शाम मिली मंजूरी, आज होगी रिहाई

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राम रहीम की पैरोल अर्जी को कल शाम उच्च स्तरीय मंजूरी दी गई। इसके तुरंत बाद सुनारिया जेल प्रशासन ने उसकी रिहाई से जुड़ी कानूनी औपचारिकताओं और कागजी कार्रवाई को पूरा करना शुरू कर दिया। सुरक्षा कारणों से राम रहीम को भारी पुलिस बल की निगरानी में जेल से बाहर ले जाया जाएगा और सीधे सिरसा पहुँचाया जाएगा।

प्रशासन की कड़ी शर्तें और पाबंदियां

हालांकि राम रहीम को 40 दिनों की आजादी मिली है, लेकिन यह कई सख्त शर्तों के साथ आती है:

  • सिरसा डेरा तक सीमित: पैरोल की पूरी अवधि के दौरान राम रहीम को सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा परिसर के भीतर ही रहना होगा।
  • सार्वजनिक आयोजनों पर रोक: वह किसी भी तरह के सार्वजनिक सभा, राजनीतिक आयोजन या बाहर जाकर किसी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकेगा।
  • पुलिस की निगरानी: स्थानीय प्रशासन और खुफिया विभाग की टीमें डेरा परिसर के आसपास मुस्तैद रहेंगी और उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।
  • सोशल मीडिया पाबंदी: पूर्व की भांति, उसके द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल या सार्वजनिक भाषणों पर भी कड़ी निगरानी रह सकती है।

राम रहीम की सजा और पैरोल का इतिहास

विवरणजानकारी
मुख्य मामलेसाध्वी यौन शोषण (रेप) और पत्रकार हत्याकांड
सजा की अवधिउम्रकैद (Life Imprisonment)
जेल का नामसुनारिया जिला कारागार, रोहतक
पैरोल की अवधि40 दिन
निवास स्थानसिरसा डेरा, हरियाणा

बार-बार पैरोल पर उठते सवाल

राम रहीम की यह 13वीं बार की जेल से बाहर आने की घटना है। पूर्व में उसे कई बार महत्वपूर्ण चुनावों से ठीक पहले पैरोल मिली है, जिसके कारण विपक्ष और सामाजिक संगठन सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि, हर बार प्रशासन का तर्क यही रहा है कि पैरोल देना जेल मैनुअल और कैदियों के अधिकारों के तहत एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें किसी भी पक्षपात की जगह नहीं है।

वर्ष 2017 में पंचकूला में हुई हिंसा के बाद से राम रहीम की सुरक्षा और उसके बाहर आने पर होने वाले घटनाक्रमों को लेकर हरियाणा और पंजाब की पुलिस हमेशा हाई अलर्ट पर रहती है।

40 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद राम रहीम को अनिवार्य रूप से सुनारिया जेल में आत्मसमर्पण (Surrender) करना होगा। तब तक सिरसा डेरे में हलचल बढ़ने की उम्मीद है, जहाँ उसके अनुयायियों का जमावड़ा लग सकता है।

By News Scoop Desk

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