न्यूज स्कूप : हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान शिव के रुद्रावतार और श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को समर्पित किया गया है। मान्यता है कि हनुमान जी के भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत या बुरी शक्तियों का भय नहीं सताता। हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध पंक्ति ‘भूत-पिशाच निकट न आवे, महावीर जब नाम सुनावे’ इस बात की पुष्टि करती है।
आखिर क्यों हनुमान जी का नाम भर लेने से भूत-प्रेत दूर भाग जाते हैं? आइए इस रहस्य को हनुमान जी की दिव्य शक्तियों और पौराणिक कथाओं के आधार पर विस्तार से समझते हैं।
हनुमान जी को भगवान शिव का ‘रुद्र’ रूप और ग्यारहवां अवतार माना जाता है। यह उनके डर का सबसे बड़ा कारण है।
- शिव का प्रभाव: चूंकि हनुमान जी साक्षात शिव का रूप हैं, और संपूर्ण जीव, देवता और असुर सभी भगवान शिव का सम्मान करते हैं। इसी वजह से भूत-प्रेत भी बजरंगबली का कहा मानते हैं।
- क्रोध: जिस तरह भगवान शिव क्रोधित होते हैं, उसी तरह हनुमान जी को भी क्रोध आता है, और उनके क्रोध की कल्पना मात्र से ही नकारात्मक शक्तियां भयभीत हो जाती हैं।
हनुमान जी को अष्ट चिरंजीवियों में से एक माना जाता है।
- प्रत्यक्ष उपस्थिति: हनुमान जी चिरंजीवी हैं, यानी वह त्रेतायुग से लेकर कलियुग तक धरती पर सक्रिय रूप से उपस्थित रहने वाले देव हैं। कलियुग में वह सबसे अधिक सक्रिय और प्रत्यक्ष देव माने जाते हैं।
- भय पर विजय: चूंकि वह चिरंजीवी हैं और हमेशा अपने भक्तों के बीच मौजूद रहते हैं, इसलिए उनकी सकारात्मक और शक्तिशाली उपस्थिति के आगे भूत-प्रेत जैसी अस्थिर और नकारात्मक शक्तियां ठहर नहीं पातीं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी को देवताओं ने अद्भुत शक्तियां प्रदान की थीं।
- अष्ट सिद्धियां: हनुमान जी के पास अष्ट सिद्धियां हैं, जो उन्हें अलौकिक क्षमताएं प्रदान करती हैं। इन सिद्धियों के नाम हैं:
- अणिमा
- महिमा
- गरिमा
- लघिमा
- प्राप्ति
- प्राकाम्य
- ईशित्व
- वशित्व
- ये अष्ट सिद्धियां हनुमान जी को इतना शक्तिशाली बनाती हैं कि कोई भी भूत-प्रेत या बुरी शक्ति उन्हें छू भी नहीं सकती।
भूत-प्रेत अज्ञान और नकारात्मकता के प्रतीक माने जाते हैं, जबकि हनुमान जी ज्ञान, बल और भक्ति के प्रतीक हैं।
- सकारात्मक शक्ति: सिद्ध देव की सकारात्मक और प्रचंड शक्तियों से भूत-प्रेत को स्वाभाविक रूप से भय लगता है और वे उनसे दूर रहते हैं। यही कारण है कि जब कोई व्यक्ति भूत-प्रेत से परेशान होता है, तो वह हनुमान जी की शरण में जाता है और उनकी पूजा करता है।
