न्यूज स्कूप : चिकित्सा जगत से एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आ रही है—वह बीमारी जिसे कभी सिर्फ 60 की उम्र के बाद का संकट माना जाता था, अब 20 और 30 साल के युवाओं की दहलीज पर दस्तक दे रही है। हम बात कर रहे हैं हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) या हाइपरटेंशन की।
आज के दौर में सबसे खतरनाक बात यह है कि 30 की उम्र पार कर रहे कई युवाओं को यह पता ही नहीं होता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ चुका है। इसी अनभिज्ञता के कारण इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी शोर-शराबे के शरीर के भीतर दिल, किडनी और दिमाग को खोखला करता रहता है।
जब हमारी धमनियों (Arteries) की दीवारों पर खून का दबाव लगातार सामान्य से अधिक बना रहता है, तो उस स्थिति को मेडिकल भाषा में हाइपरटेंशन कहते हैं। इसे दो पैमानों पर मापा जाता है:
- सिस्टोलिक (Systolic): जब दिल खून को पंप करता है।
- डायस्टोलिक (Diastolic): जब धड़कनों के बीच दिल आराम करता है।
सामान्य रीडिंग: 120/80 mmHg
हाई बीपी की श्रेणी: यदि सिस्टोलिक 140 mmHg या उससे ज्यादा, और डायस्टोलिक 90 mmHg या उससे ऊपर बना रहे।
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो 30 की उम्र में हाई बीपी होना बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं है। यह एक रेड सिग्नल है कि आपका शरीर आंतरिक दबाव को झेलने में असमर्थ हो रहा है।
- भविष्य का खतरा: यदि 30 की उम्र में बीपी बढ़ रहा है, तो 40 की उम्र तक आते-आते हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी फेलियर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
- जांच है जरूरी: 30 साल के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम 2 बार अपना बीपी चेक कराना चाहिए। यदि परिवार में बीपी की हिस्ट्री है, तो आपको और भी अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
30 की उम्र में बीपी बढ़ने के पीछे आपकी दिनचर्या से जुड़ी ये गलतियाँ जिम्मेदार हो सकती हैं:
- मॉडर्न लाइफस्टाइल का दबाव: घंटों लैपटॉप और मोबाइल के सामने बैठना, शारीरिक गतिविधि का शून्य होना और देर रात तक जागने से शरीर की प्राकृतिक लय बिगड़ जाती है।
- तनाव और करियर की चिंता: नौकरी, पैसा और रिश्तों की उलझन युवाओं में ‘कोर्टिसोल’ जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ा देती है, जो सीधे तौर पर बीपी को ट्रिगर करते हैं।
- खानपान में गड़बड़ी: पैकेट बंद स्नैक्स, फास्ट फूड और ऊपर से नमक डालने की आदत धमनियों को सख्त बना देती है। अत्यधिक मीठे ड्रिंक्स भी वजन और बीपी बढ़ाते हैं।
- मोटापा और नशे की लत: पेट के आसपास की चर्बी हाई बीपी का सबसे बड़ा संकेत है। इसके अलावा, धूम्रपान और शराब का सेवन धमनियों में रुकावट पैदा करता है।
- नींद की कमी: शरीर को रिपेयर होने के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद चाहिए। रोज सिर्फ 4-5 घंटे सोना दिल पर भारी दबाव डालता है।
| आयु वर्ग | बीपी की स्थिति | स्थिति का प्रभाव |
| 20 – 30 वर्ष | सामान्य 120/80 | स्वस्थ धमनियां |
| 30 – 40 वर्ष | यदि 130/85 | भविष्य में गंभीर बीमारी का संकेत |
| 40+ वर्ष | यदि 140/90 | तुरंत डॉक्टरी सलाह और दवा की जरूरत |
- नमक कम करें: दिनभर में 5 ग्राम से ज्यादा नमक का सेवन न करें।
- शारीरिक सक्रियता: रोज कम से कम 30 मिनट की पैदल चाल (Brisk Walk) या योग करें।
- तनाव प्रबंधन: मेडिटेशन या गहरी सांस लेने वाले व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
- वजन नियंत्रण: संतुलित आहार लें और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं।
30 की उम्र में हाई बीपी होना इस बात का प्रमाण है कि आपकी लाइफस्टाइल गलत दिशा में जा रही है। इसे उम्र का तकाजा समझकर नजरअंदाज न करें, बल्कि समय रहते आदतों में सुधार करें ताकि भविष्य में ‘साइलेंट किलर’ आप पर भारी न पड़े।
