न्यूज स्कूप : अंग्रेजी कैलेंडर में नया साल 1 जनवरी से शुरू होता है, लेकिन भारतीय सनातन परंपरा में समय की गणना विक्रम संवत के आधार पर की जाती है। आने वाला विक्रम संवत 2083 ज्योतिषीय और खगोलीय दृष्टि से एक दुर्लभ वर्ष होने जा रहा है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक और विख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, साल 2026 में हिंदू कैलेंडर 12 नहीं, बल्कि पूरे 13 महीनों का होगा।
इस अद्भुत घटना का मुख्य कारण पंचांग में ‘अधिकमास’ (मलमास) का जुड़ना है। इस बार ज्येष्ठ का महीना 30 दिन के बजाय लगभग 60 दिनों का होगा, जिससे साल के सभी प्रमुख व्रत और त्योहार 15 से 20 दिन की देरी से आएंगे।
विक्रम संवत 2083 में ज्येष्ठ माह में अधिकमास लगने के कारण दो ज्येष्ठ महीने होंगे—एक सामान्य और दूसरा अधिक (पुरुषोत्तम मास)।
- नवसंवत्सर का प्रारंभ: 19 मार्च 2026 (गुड़ी पड़वा/वासंती नवरात्रि)
- अधिक ज्येष्ठ मास (मलमास): 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक
- सामान्य ज्येष्ठ मास: 22 मई 2026 से 29 जून 2026 तक
विशेष: 17 मई से 15 जून की अवधि ‘पुरुषोत्तम मास’ कहलाएगी, जिसमें धार्मिक अनुष्ठान तो होंगे लेकिन मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे।
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि चंद्रमा और सूर्य के कैलेंडर के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए ‘अधिकमास’ की व्यवस्था की गई है।
| वर्ष प्रकार | कुल दिन | अंतर |
| सौर वर्ष (Solar Year) | 365 दिन, 6 घंटे | — |
| चंद्र वर्ष (Lunar Year) | 354 दिन, 9 घंटे | 11 दिन का अंतर |
हर 32 महीने और 16 दिन के बाद यह अंतर बढ़कर लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। पंचांग को संतुलित करने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। यदि ऐसा न किया जाए, तो हमारे त्योहार ऋतुओं से अलग हो जाएंगे (जैसे होली सर्दियों में और दिवाली बारिश में आने लगेगी)।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने (मलमास) को किसी देवता ने नहीं अपनाया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ दिया।
- क्या करें: यह समय जप, तप, दान, तीर्थ यात्रा और भागवत कथा के लिए सर्वोत्तम है। इस माह में की गई साधना का फल कई गुना अधिक मिलता है।
- क्या न करें: मलमास के दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नामकरण, यज्ञोपवीत, भूमि पूजन या नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। मान्यता है कि इस समय ग्रह-नक्षत्र मांगलिक कार्यों के अनुकूल नहीं होते।
अधिकमास के कारण 15 जून के बाद आने वाले सभी त्योहार जैसे रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दीपावली सामान्य समय से करीब 2-3 सप्ताह की देरी से मनाए जाएंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, यह 13 महीनों का साल आध्यात्मिक उन्नति चाहने वालों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आएगा।
साल 2026 का हिंदू कैलेंडर हमें प्रकृति और खगोल विज्ञान के गहरे संबंधों की याद दिलाता है। ज्येष्ठ के दो महीनों का यह संयोग न केवल पंचांग को शुद्ध करेगा, बल्कि श्रद्धा और भक्ति के लिए अतिरिक्त समय भी प्रदान करेगा।
