न्यूज स्कूप : सलाद पत्ता, जिसे अंग्रेजी में लेट्यूस (Lettuce) कहते हैं, सैंडविच और सलाद को क्रंच देने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। हरी पत्तेदार सब्जियों में शामिल लेट्यूस में कैलोरी काफी कम होती है और पानी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, इसलिए यह फिटनेस फ्रीक लोगों के बीच काफी पॉपुलर है।
चूंकि भारत में इसकी खेती अभी सीमित जगहों पर होती है, इसलिए यह सुपरमार्केट या ऑनलाइन में अक्सर महंगा मिलता है। अगर आप अपने सलाद, बर्गर या रैप्स में ताज़ा क्रंच एड करना चाहते हैं, तो इसे घर पर उगाना एक बेहतरीन और किफायती विकल्प है। इसे उगाने की पूरी प्रक्रिया काफी सरल है।
लेट्यूस को उगाने का सबसे बेस्ट टाइम सर्दी का मौसम होता है।
- तापमान: शुरुआती तौर पर इन्हें ग्रो होने के लिए ठंडे वातावरण की जरूरत होती है। लेट्यूस के पौधे उगाने के लिए के पचपन डिग्री फ़ारेनहाइट (लगभग बारह दशमलव आठ डिग्री सेल्सियस) और पचहत्तर डिग्री फ़ारेनहाइट (लगभग तेईस दशमलव नौ डिग्री सेल्सियस) के बीच का तापमान सही माना जाता है।
- देखभाल: ये ठंडे मौसम में आराम से बढ़ते हैं, हालांकि पाला पड़ने पर इन्हें शेड (छाया) में रखना चाहिए। गर्म मौसम में रोमेन और रेड लेट्यूस जैसी किस्में भी उगाई जा सकती हैं।
हेल्थलाइन के अनुसार, लेट्यूस पोषक तत्वों का भंडार है:
- विटामिन सी: यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो इम्यूनिटी बूस्ट करने में सहायक है।
- कैल्शियम: यह हमारी हड्डियों को मजबूत रखता है और मसल्स फंक्शन, नर्व फंक्शन और ब्लड क्लॉटिंग के लिए जरूरी है।
- अन्य पोषक तत्व: इसमें विटामिन के, विटामिन ए (बीटा कैरोटीन जो आंखों के लिए फायदेमंद है), फोलेट और पोटेशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं।
लेट्यूस उगाने के लिए सही जल निकासी सबसे महत्वपूर्ण है।
- कंटेनर: आप स्टील, प्लास्टिक या मिट्टी का कोई भी कंटेनर ले सकते हैं। इसकी तली में एक मुख्य सुराख करने के अलावा कंटेनर के चारों तरफ दो से तीन सुराख और करने होंगे। ऐसा इसलिए, क्योंकि लेट्यूस को नमी चाहिए, लेकिन ज्यादा पानी से ये सड़ सकते हैं।
- मिट्टी: पॉटिंग सॉइल के साथ कंपोस्ट खाद (जैसे वर्मी कंपोस्ट) मिलाकर मिट्टी तैयार करें।
- तैयारी: मिट्टी को हल्का नम करके गमले में भरें। बीज लगाने से पहले मिट्टी को एक छोटे हैंड रैक से थोड़ा-थोड़ा खोदकर हवादार बनाएं, ताकि अंकुरण के बाद जड़ें अच्छे से फैल सकें।
लेट्यूस के बीज सुपरमार्केट या ऑनलाइन आसानी से मिल जाते हैं।
- बीज का चयन: बीजों को पानी में भिगो दें और पानी की सतह पर तैर रहे बीजों को हटा दें (ये आमतौर पर अंकुरित नहीं होते)।
- बुवाई: बाकी के बीजों को निकालकर गमले में 1 से 2 इंच की दूरी पर डालते जाएं।
- पानी: ऊपर से पॉटिंग मिक्स मिट्टी की एक पतली परत बिछा दें और थोड़ा सा पानी छिड़क दें। ध्यान रखें कि सिर्फ नमी बनी रहे, बहुत ज्यादा पानी न डालें।
- अंकुरण और रोपण: लेट्यूस के बीज आमतौर पर 7 से 10 दिन में अंकुरित हो जाते हैं। जब शुरुआत में दो से तीन छोटे पत्ते निकलें, तो उनकी छंटाई कर दें, जिससे पौधे को बढ़ने के लिए जगह मिलती है।
- कीट नियंत्रण: पत्तों के ग्रो होने के बाद कीटों से बचाने के लिए आप नीम के तेल का छिड़काव कर सकते हैं।
- खाद: समय-समय पर सब्जियों, फलों के छिलके या सूखी पत्तियों से बनी ऑर्गेनिक खाद पौधे की जड़ों में डाल सकते हैं।
- कटाई (Harvesting): आप आमतौर पर इसे 30 से 35 दिनों में छोटी पत्तियां काट सकते हैं। हार्वेस्टिंग के लिए पत्तों को कैंची से 1 से डेढ़ इंच की ऊंचाई से काटें।
लेट्यूस को एक बार लगाने के बाद आप इससे कई बार कटाई कर सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे तुरंत तोड़कर उपयोग करने पर इसका क्रंच और पोषण बरकरार रहता है, जो बाज़ार से लाए गए लेट्यूस में कम हो जाता है।
