न्यूज स्कूप : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी के प्रमुख इमरान खान की सेहत और सुरक्षा को लेकर देश में एक बार फिर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। इमरान खान वर्तमान में अडियाला जेल में बंद हैं, लेकिन पिछले तीन हफ्तों से उनके परिवार और वकीलों को उनसे मुलाकात की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण उनकी स्थिति को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गया है।
पीटीआई नेता फवाद चौधरी ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत के दौरान यह बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि हालांकि सोशल मीडिया पर उनकी सेहत को लेकर फैली खबरों का कोई आधार नहीं है, लेकिन परिवार और वकीलों की मुलाकात न होना ही इस संदेह का मुख्य कारण है।
फवाद चौधरी ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि यदि परिवार को एक बार उनसे मिलने दिया जाए, तो पूरा मामला साफ हो जाएगा और सभी गलतफहमियां खत्म हो जाएंगी।
- मुख्य आरोप: पिछले तीन हफ्तों से परिवार और वकीलों को जेल प्रशासन द्वारा इमरान खान से मिलने से रोका जा रहा है।
- परिणाम: मुलाकात न होने के कारण पीटीआई कार्यकर्ता और परिवारजनों में डर बैठ गया है, और वे जेल के बाहर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
- पार्टी एक्शन: पार्टी की तरफ से इस पूरे मामले को लेकर पाकिस्तान की सीनेट में आधिकारिक शिकायत भी दर्ज की गई है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने पीटीआई के इन आरोपों और सोशल मीडिया पर फैले दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
- सरकारी पक्ष: राणा सनाउल्लाह ने अपने बयान में कहा है कि इमरान खान की सेहत को लेकर सोशल मीडिया पर जो बातें लिखीं जा रही हैं, उनका असलियत से कोई संबंध नहीं है।
- मेडिकल अपडेट: उन्होंने बताया कि इमरान खान की रोज मेडिकल जांच होती है और उनकी सभी जरूरतों का ध्यान रखा जाता है।
- जेल स्थान की पुष्टि: उन्होंने इस दावे को भी झूठा बताया कि इमरान को किसी दूसरी जेल में भेज दिया गया है, और पुष्टि की कि वह अडियाला जेल में ही हैं।
इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उन्हें तौशखाना और भ्रष्टाचार के मामलों में 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। क्रिकेटर से प्रधानमंत्री रह चुके इमरान खान ने इन सभी कार्रवाईयों को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित करार दिया है।
इस पूरे संवेदनशील मामले में, पाकिस्तान के गृह मंत्रालय (Ministry of Interior) ने अभी तक किसी तरह का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। परिवार को लगातार मुलाकात की अनुमति न देना, राजनीतिक तनाव को और बढ़ा रहा है, जिससे जेल प्रशासन और सरकार की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
