न्यूज स्कूप : साल 2025 में भारी उतार-चढ़ाव और ऐतिहासिक गिरावट का सामना करने के बाद भारतीय रुपये (Indian Rupee) ने अब वापसी के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं, डॉलर की मजबूती और विदेशी पूंजी की भारी निकासी के कारण एक समय रुपया 91 प्रति डॉलर के चिंताजनक स्तर को पार कर गया था। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सक्रिय हस्तक्षेप और बाजार में नकदी बढ़ाने के ठोस कदमों ने रुपये को एक बार फिर संजीवनी प्रदान की है।
बुधवार को विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने जबरदस्त मजबूती दिखाते हुए निवेशकों के भरोसे को बहाल किया है।
बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे मजबूत होकर 89.51 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिकवरी के पीछे आरबीआई की वह बड़ी घोषणा है जिसमें बाजार के लिए करीब तीन लाख करोड़ रुपये की पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
- ओपनिंग: अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 89.56 पर खुला।
- इंट्राडे मूवमेंट: कारोबार के दौरान यह 89.51 के उच्च स्तर और 89.65 के निचले स्तर के बीच घूमता रहा।
- डॉलर इंडेक्स का हाल: दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.07% गिरकर 97.87 पर आ गया, जिससे भारतीय रुपये जैसी उभरती मुद्राओं को सांस लेने की जगह मिली।
रुपये की मजबूती का असर घरेलू शेयर बाजारों पर भी साफ नजर आया। बुधवार सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते दिखे:
- सेंसेक्स (Sensex): शुरुआती कारोबार में 63.82 अंक चढ़कर 85,588.66 के स्तर पर पहुंच गया।
- निफ्टी (Nifty): 32.80 अंक की बढ़त के साथ 26,209.95 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि आरबीआई के लिक्विडिटी बूस्ट के फैसले से निवेशकों का सेंटिमेंट सुधरा है और बाजार में खरीदारी का रुख बना है।
बाजार और रुपये में आई इस मजबूती के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) अभी भी ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की नीति अपनाए हुए हैं। मंगलवार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से 1,794.80 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बाजार से पूंजी निकाली। वैश्विक स्तर पर टैरिफ संबंधी चिंताओं और भू-राजनीतिक तनाव के चलते विदेशी निवेशक फिलहाल भारतीय बाजार में बड़ा निवेश करने से बच रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव लगभग स्थिर बना हुआ है। बुधवार को यह 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 62.39 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता भारत जैसे आयात निर्भर देश के लिए व्यापार घाटे को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।
आरबीआई के समय पर किए गए हस्तक्षेप ने रुपये को 91 के खतरनाक स्तर से वापस खींचने में कामयाबी हासिल की है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डॉलर इंडेक्स में गिरावट जारी रहती है और घरेलू लिक्विडिटी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में रुपया 89 के स्तर के नीचे भी आ सकता है।
