न्यूज स्कूप : वैश्विक बाजारों में आई भारी गिरावट का असर आज भारतीय शेयर बाजार में भी देखने को मिला। मंगलवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत तो मजबूती के साथ हुई, लेकिन जल्द ही मार्केट की चाल डगमगा गई और सूचकांक लाल निशान में फिसल गए।
कमजोरी के चलते, बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 200 अंक फिसलकर 84,750 के स्तर पर आ गया। हालांकि, एनएसई का 50 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी अभी भी 72 अंक की बढ़त के साथ 25,940 पर कारोबार करता नजर आ रहा है, जो बाजार में चुनिंदा शेयरों में खरीदारी बने रहने का संकेत देता है।
ग्लोबल मार्केट में कमजोरी के चलते आज भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आने के आसार लगाए जा रहे थे। सुबह गिफ्ट निफ्टी भी 26,001 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से 59 अंकों की गिरावट थी।
हालांकि, इन कमजोर संकेतों के बावजूद, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी देखी गई। सेंसेक्स 91 अंक उछलकर 85,042 पर खुला और निफ्टी भी 8 अंकों की तेजी के साथ 26,021 पर कारोबार शुरू किया। लेकिन यह तेजी कायम नहीं रह सकी और बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 85,000 के नीचे आ गया।
भारतीय बाजारों पर दबाव का मुख्य कारण वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों में आई भारी बिकवाली है।
एशियाई बाजार (मंगलवार):
वॉल स्ट्रीट में रातभर गिरावट का असर मंगलवार को एशियाई बाजारों में भी साफ तौर पर देखने को मिला। जापान का निक्केई 2.25%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.19% और हांगकांग का हेंग सेंग 1% नीचे रहे। शुरुआती कारोबारी में ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 भी 0.76% की गिरावट के साथ लाल निशान में रहा।
वॉल स्ट्रीट (पिछला बंद भाव):
- डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज: 557.24 अंक (1.18%) गिरकर 46,590.24 पर बंद हुआ।
- एसएंडपी 500: 0.92% गिरकर 6,672.41 पर बंद हुआ।
- नैस्डैक कंपोजिट: 0.84% की गिरावट के साथ 22,708.07 के लेवल पर बंद हुआ।
सोमवार, 17 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹442 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी अपनी खरीदारी का सिलसिला जारी रखते हुए दिन में ₹1,466 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश कर डाला।
यूरो, येन, पाउंड, स्विस फ्रैंक, कनाडाई डॉलर और स्वीडिश क्रोना इन छह विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की वैल्यू को मापने वाला अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) मंगलवार सुबह 0.03% चढ़कर 99.57 पर पहुंच गया। सूचकांक बढ़ने का मतलब डॉलर का मजबूत होना है। वहीं, 17 नवंबर को रुपया 0.14% गिरकर डॉलर के मुकाबले 88.63 पर बंद हुआ था।
