न्यूज स्कूप: भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को 6 लाख करोड़ रुपए से अधिक का मोटा नुकसान उठाना पड़ा है। अक्टूबर महीने में 4% से अधिक की तेजी के बाद, नवंबर के पहले सप्ताह में विदेशी निवेशकों की भारी मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितता ने बाजार की बाजी पलट दी है।
शुक्रवार (07 नवंबर) को रिकवरी के बावजूद, प्रमुख सूचकांक लाल निशान पर बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 94.73 अंकों की मामूली गिरावट के साथ 83,216.28 पर बंद हुआ, जबकि दिन के कारोबार में यह 640.06 अंक तक गिर गया था। वहीं, निफ्टी 17.40 अंकों की गिरावट के साथ 25,492.30 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स: 762.21 अंकों की कुल गिरावट।
निफ्टी: 271.05 अंकों की कुल गिरावट।
शेयर बाजार में इस अचानक आई गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली सबसे बड़ा कारण बनी हुई है।
1. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली (FII Outflows)
बिकवाली का दबाव: FII ने अक्टूबर की खरीदारी की गति को तोड़ते हुए फिर से मुनाफावसूली शुरू कर दी है। नवंबर में अब तक विदेशी निवेशकों ने 6,214 करोड़ रुपए मूल्य के भारतीय शेयर बेचे हैं।
रणनीति: विश्लेषकों का मानना है कि FII अपनी पूंजी को कम मूल्यांकित (Cheaper) एशियाई बाजारों में स्थानांतरित कर रहे हैं। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन FII की बिकवाली का दबाव भारी पड़ रहा है।
2. कमजोर वैश्विक संकेत (Weak Global Cues)
वॉल स्ट्रीट का असर: अमेरिकी बाजारों में बढ़ी हुई वैल्यूएशन को लेकर चिंता है। इसके अलावा, अमेरिका में एक और ब्याज दर कटौती की उम्मीदें कम होने से निवेशक सतर्क हो गए हैं।
एशियाई बाजार: शुक्रवार को जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी जैसे प्रमुख एशियाई बाजार 2% तक की भारी गिरावट के साथ बंद हुए, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
3. आर्थिक संकेतकों का नरम पड़ना (Soft Economic Indicators)
नॉमिनल GDP: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY26) में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रही, लेकिन नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 9.6% से घटकर 8.8% रह गई। नॉमिनल जीडीपी कॉर्पोरेट कमाई के लिए महत्वपूर्ण होती है, और इसकी धीमी वृद्धि बाजार की बढ़त को सीमित कर रही है।
सर्विस सेक्टर: अगस्त में 15 साल के शिखर पर पहुँचने के बाद, भारत का सर्विस सेक्टर अक्टूबर में 5 महीने के निचले स्तर पर आ गया, जो अर्थव्यवस्था में कुछ कमजोरी का संकेत है।
4. ट्रेड डील पर अनिश्चितता
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सकारात्मक बातचीत के बावजूद, संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अनिश्चितता बनी हुई है, जो निवेशकों में चिंता पैदा कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक बाजारों में स्थिरता नहीं आती और FII की बिकवाली रुक नहीं जाती, तब तक बाजार में अस्थिरता जारी रहेगी। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे इस गिरावट को गुणवत्तापूर्ण लार्ज-कैप शेयरों में निवेश करने के अवसर के रूप में देखें।

