न्यूज़ स्कूप डेस्क : भारत-पाकिस्तान संबंध एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहाँ बयानबाज़ी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को लेकर बेहद सख्त और आक्रामक टिप्पणी की है। आसिफ ने खुले तौर पर कहा कि भारत के साथ युद्ध की संभावना को नकारा नहीं जा सकता, और पाकिस्तान की सेना किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्लामाबाद पहले ही देशभर में सुरक्षा अलर्ट की स्थिति में है।
ख्वाजा आसिफ की यह चेतावनी भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के उस बयान के बाद सामने आई जिसमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को “88 घंटे का ट्रेलर” बताया था। जनरल द्विवेदी ने साफ कहा था कि परिस्थितियाँ बिगड़ने पर भारतीय सेना पाकिस्तान को “पड़ोसी से जिम्मेदारी से पेश आना” सिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस तीखी बयानबाज़ी ने दोनों देशों के बीच तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
समा टीवी को दिए इंटरव्यू में आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान न तो भारत को नज़रअंदाज़ कर रहा है और न ही उस पर भरोसा कर सकता है। उनके शब्दों में, हम किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। भारत से किसी भी तरह की शत्रुतापूर्ण पहल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका यह बयान बताता है कि पाकिस्तान की राजनीतिक नेतृत्व अब खुले तौर पर युद्ध जैसी स्थितियों की चर्चा कर रहा है, जो क्षेत्रीय तनाव को और गहरा करता है।
पिछले कुछ महीनों में भारत में हुई हिंसक घटनाओं ने भी इस तनाव को बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाई है। 10 नवंबर को दिल्ली में कार विस्फोट में 15 लोगों की मौत और उससे पहले पहलगाम में हुए हमलों ने भारतीय खुफिया एजेंसियों को अत्यधिक सतर्क कर दिया है। इन घटनाओं ने सुरक्षा ढांचे पर कई सवाल खड़े किए और भारत की विदेश नीति में भी कड़ाई की झलक दिखाई।
ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में यह भी दावा किया कि पाकिस्तान एक साथ दो मोर्चों पूर्व (भारत) और पश्चिम (अफगानिस्तान) पर लड़ने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले भी विपरीत परिस्थितियों से निकल चुका है और “अगर हालात अंतिम दौर की ओर धकेले गए, तो युद्ध के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचेगा।” उनकी यह टिप्पणी यह स्पष्ट करती है कि पाकिस्तान अब खुद को घिरे हुए देश के रूप में पेश करते हुए आक्रामक मुद्रा अपनाना चाहता है।
उधर पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर भी हालात सामान्य नहीं हैं। तालिबान के साथ हाल की झड़पों में पाकिस्तानी सेना को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बाद तुर्किये और कतर की मध्यस्थता से 19 अक्टूबर को युद्धविराम लागू कराया गया, लेकिन झड़पों का असर पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति को अस्थिर कर गया है। यही दबाव अब भारत के संदर्भ में भी पाकिस्तान की प्रतिक्रिया में दिख रहा है।
ख्वाजा आसिफ का यह नया बयान इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान आंतरिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सीमा संघर्षों के बीच बाहरी खतरे को बड़ा मुद्दा बनाकर राजनीतिक और सैन्य नैरेटिव को मजबूत करना चाहता है। वहीं भारत की ओर से दिए गए सैन्य संकेत यह बताते हैं कि नई दिल्ली किसी भी तरह की उकसावे वाली स्थिति में अब अधिक आक्रामक प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार है।
बढ़ते बयानबाज़ी और दोनों देशों की सैन्य सतर्कता इस क्षेत्र को फिर से तनावपूर्ण और अस्थिर स्थिति की ओर धकेलती दिख रही है। South Asia एक बार फिर उस दहलीज पर खड़ा है जहाँ किसी भी गलत कदम से हालात गंभीर मोड़ ले सकते हैं।
