न्यूज स्कूप : कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर ‘नेतृत्व परिवर्तन’ की लहरें उठने लगी हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच की सत्ता की जंग अब मैसूरु एयरपोर्ट के रनवे तक पहुँच गई है। बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के साथ डीके शिवकुमार की हुई संक्षिप्त लेकिन ‘एकांत’ बातचीत ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को फिर से जिंदा कर दिया है।
इस मुलाकात के तुरंत बाद डीके शिवकुमार द्वारा साझा किए गए एक रहस्यमयी सोशल मीडिया पोस्ट ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने लिखा, “कोशिश असफल हो सकती है, लेकिन प्रार्थना कभी असफल नहीं होती।” राजनीतिक विश्लेषक इस पोस्ट को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने की उनकी अटूट इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं।
मंगलवार को राहुल गांधी तमिलनाडु के गुडलूर जाने के क्रम में मैसूरु के मंडकल्लि एयरपोर्ट पहुंचे थे। लेकिन असली सियासी ड्रामा तब हुआ जब वे दिल्ली लौटने के लिए वापस मैसूरु आए।
- एकांत बातचीत: डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पहुँचने से पहले ही एयरपोर्ट पहुँच गए। राहुल गांधी के विमान के पास रनवे पर दोनों नेताओं के बीच करीब 3 मिनट तक आमने-सामने बातचीत हुई। इस दौरान वहां कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद नहीं था।
- सिद्धारमैया की एंट्री: कुछ मिनट बाद सिद्धारमैया भी वहां पहुंचे, लेकिन तब तक डीके और राहुल के बीच की मुख्य चर्चा समाप्त हो चुकी थी।
- सुरक्षा घेरा: हाल ही में मंगलुरु एयरपोर्ट पर हुई नारेबाजी की घटना को देखते हुए इस बार कार्यकर्ताओं के प्रवेश पर सख्त पाबंदी थी, ताकि कोई शक्ति प्रदर्शन न हो सके।
लगातार हो रही चर्चाओं से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अब असहज नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने राहुल गांधी से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पार्टी में हर रोज नेतृत्व परिवर्तन को लेकर नया भ्रम पैदा नहीं होना चाहिए।
- स्थायी समाधान की मांग: सिद्धारमैया ने हाईकमान से अपील की है कि इस मुद्दे का जल्द ही कोई स्थायी समाधान निकाला जाए ताकि सरकार के कामकाज पर असर न पड़े।
- हाईकमान का फैसला: सार्वजनिक रूप से सिद्धारमैया यही कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री पद पर कोई भ्रम नहीं है और अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही लेगा।
| नेता | पक्ष/तर्क | वर्तमान स्थिति |
| सिद्धारमैया | जनसमर्थन और अनुभव का हवाला; कार्यकाल पूरा करने की इच्छा। | मुख्यमंत्री पद पर काबिज, हाईकमान के फैसले का इंतजार। |
| डीके शिवकुमार | ‘ट्रबलशूटर’ की छवि; चुनाव के समय किए गए वादे (50-50 फॉर्मूला) का दावा। | ‘वेटिंग मोड’ में, राहुल गांधी से सीधी पैरवी जारी। |
| हाईकमान | आगामी चुनावों और राज्य की स्थिरता को देख रहा है। | दोनों गुटों को साधने की कोशिश में मौन। |
डीके शिवकुमार का “प्रार्थना कभी असफल नहीं होती” वाला पोस्ट यह संकेत दे रहा है कि वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। वहीं, सिद्धारमैया खेमा इस बात पर अड़ा है कि वर्तमान नेतृत्व में कोई बदलाव राज्य के लिए ठीक नहीं होगा। राहुल गांधी के साथ हुई इस संक्षिप्त मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और ‘दिल्ली दरबार’ को जल्द ही हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
कर्नाटक की ‘कुर्सी’ की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। राहुल गांधी को दी गई फीडबैक के बाद अब गेंद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और हाईकमान के पाले में है। क्या कर्नाटक को नया मुख्यमंत्री मिलेगा या सिद्धारमैया अपनी पारी जारी रखेंगे, इसका फैसला आने वाले हफ्तों में हो सकता है।
