27 Feb 2026, Fri
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KDMC Mayor Race: कल्याण-डोंबिवली में मेयर की कुर्सी के लिए बिछी बिसात; उद्धव गुट के पार्षदों के नॉट रीचेबल होने से मचा हड़कंप

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न्यूज स्कूप : महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद अब असली जंग ‘मेयर’ की कुर्सी को लेकर शुरू हो गई है। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में स्थिति सबसे ज्यादा पेचीदा नजर आ रही है। मंगलवार, 20 जनवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार, किसी भी एक दल के पास बहुमत का स्पष्ट आंकड़ा नहीं है।

सभी की निगाहें अब 22 जनवरी को होने वाली आरक्षण लॉटरी पर टिकी हैं, जिसके बाद ही मेयर पद के उम्मीदवारों की आधिकारिक तस्वीर साफ होगी। हालांकि, इस संवैधानिक प्रक्रिया से पहले राजनीतिक दलों के बीच ‘नंबर गेम’ और पार्षदों की ‘नॉट रीचेबल’ होने की खबरों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।

KDMC का संख्याबल: बहुमत से दूर दिग्गज

कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में कुल 122 सीटें हैं और मेयर बनाने के लिए 62 पार्षदों का समर्थन यानी जादुई आंकड़ा जरूरी है।

राजनीतिक दलजीती गई सीटें
शिवसेना (एकनाथ शिंदे)52
बीजेपी (BJP)51
शिवसेना (उद्धव ठाकरे)11
मनसे (राज ठाकरे)05
NCP (शरद पवार)01
NCP (अजित पवार)00

जादुई आंकड़ा: 62

यहाँ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वे बहुमत से 10 कदम दूर हैं। वहीं, बीजेपी भी कड़ी टक्कर में है, लेकिन उसे भी निर्दलीयों या अन्य दलों के सहारे की जरूरत है।

उद्धव गुट के पार्षद ‘नॉट रीचेबल’: क्या है हकीकत?

चुनाव नतीजों के तुरंत बाद खबर आई कि उद्धव ठाकरे गुट के 9 पार्षद संपर्क से बाहर हो गए हैं। विशेष रूप से पार्षद मधुर म्हात्रे और कीर्ती ढोणे को लेकर ‘नॉट रीचेबल’ होने की चर्चा ने जोर पकड़ा।

  • शिंदे गुट का स्पष्टीकरण: शिवसेना (शिंदे गुट) के संपर्क प्रमुख महेश गायकवाड़ ने इन अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने ठाकरे गुट के जिला प्रमुख शरद पाटील से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों पार्षद ठाकरे गुट के ही संपर्क में हैं और शिंदे गुट उनके साथ कोई संपर्क नहीं कर रहा है।
  • उद्धव गुट की चेतावनी: उधर, उद्धव गुट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि जो पार्षद पार्टी लाइन से बाहर जाकर ‘नॉट रीचेबल’ हुए हैं, उन पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

22 जनवरी: आरक्षण तय होने के बाद शुरू होगा असली खेल

कल्याण-डोंबिवली में मेयर का पद किसके पास जाएगा, यह काफी हद तक इस पर निर्भर करेगा कि मेयर की कुर्सी किस वर्ग के लिए आरक्षित होती है।

  1. लॉटरी सिस्टम: 22 जनवरी को लॉटरी के जरिए आरक्षण की घोषणा होगी।
  2. रणनीति: यदि आरक्षण किसी विशेष वर्ग के लिए होता है, तो बीजेपी और शिंदे सेना को अपनी रणनीति दोबारा बनानी पड़ सकती है।
  3. मनसे की भूमिका: राज ठाकरे की मनसे के 5 पार्षद यहाँ ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकते हैं, यदि शिंदे सेना और बीजेपी के बीच आपसी सहमति नहीं बनती है।

महायुति के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’?

हैरानी की बात यह है कि राज्य में एक साथ सरकार चलाने वाली शिवसेना (शिंदे) और बीजेपी यहाँ आमने-सामने नजर आ रही हैं। अजित पवार की पार्टी यहाँ शून्य पर सिमट गई है, जिससे महायुति के समीकरणों पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या शिंदे और बीजेपी मिलकर मेयर बनाएंगे या फिर उद्धव गुट और मनसे के साथ मिलकर कोई नया ‘लोकल’ गठबंधन बनेगा, यह अगले 48 घंटों में साफ हो जाएगा।

कल्याण-डोंबिवली की राजनीति फिलहाल रिजॉर्ट पॉलिटिक्स और बैठकों के दौर से गुजर रही है। मेयर पद के आरक्षण की लॉटरी ही इस सस्पेंस से पर्दा उठाएगी।

By News Scoop Desk

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