न्यूज स्कूप : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। कथित IRCTC घोटाले में घिरे लालू यादव ने निचली अदालत (राउज एवेन्यू कोर्ट) द्वारा तय किए गए आरोपों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। लालू यादव की यह महत्वपूर्ण याचिका सोमवार (5 जनवरी 2026) को जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई है।
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। उन पर अपने पद का दुरुपयोग कर निजी कंपनियों को फायदा पहुँचाने और बदले में रिश्वत के रूप में जमीन लेने का आरोप है।
पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश की धाराओं में आरोप तय किए थे।
- अदालत की टिप्पणी: स्पेशल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव को इस पूरी साजिश की जानकारी थी।
- टेंडर में हेरफेर: आरोप है कि पटना और पुरी स्थित रेलवे के दो होटलों के टेंडर की पात्रता शर्तों में जानबूझकर बदलाव किए गए ताकि खास निजी पार्टियों (सुजाता होटल्स) को लाभ पहुंचाया जा सके।
| वर्ष | घटनाक्रम |
| 2004-2009 | रेल मंत्री रहते हुए कथित घोटाला और साजिश। |
| 2017 | सीबीआई (CBI) ने भ्रष्टाचार के मामले में FIR दर्ज की। |
| अक्टूबर 2025 | राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी पर आरोप तय किए। |
| जनवरी 2026 | लालू यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में आदेश को चुनौती दी। |
सीबीआई के मुताबिक, लालू यादव ने रेल मंत्री के पद पर रहते हुए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। इस साजिश के बदले में लालू परिवार के सदस्यों को बेनामी संपत्ति और शेल कंपनियों के जरिए रिश्वत मिली।
- जमीन का सौदा: आरोप है कि होटलों के टेंडर देने के बदले में पटना के बेली रोड पर स्थित कीमती जमीन लालू परिवार से जुड़ी कंपनियों को बेहद कम कीमत पर ट्रांसफर की गई।
- चार्जशीट: सीबीआई ने अपनी जांच पूरी करने के बाद लालू प्रसाद यादव और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
लालू यादव की दलील है कि निचली अदालत ने तथ्यों को पूरी तरह परखे बिना आरोप तय किए हैं। सोमवार को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या हाई कोर्ट निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाएगा या फिर लालू यादव को नियमित ट्रायल (मुकदमे) का सामना करना होगा। अगर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो लालू परिवार के लिए कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
बिहार की राजनीति के सबसे कद्दावर नेता के खिलाफ चल रहा यह कानूनी संघर्ष न केवल उनके राजनीतिक करियर बल्कि राजद के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
