न्यूज स्कूप : महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक कथित लैंड डील ने भूचाल ला दिया है। विवाद के केंद्र में राज्य के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार और उनके बेटे पार्थ पवार हैं। आरोप है कि पार्थ पवार से जुड़ी एक कंपनी ने पुणे के मुंधवा इलाके में करीब 40 एकड़ सरकारी जमीन, जिसकी वास्तविक कीमत 1800 करोड़ रुपये थी, उसे सिर्फ 300 करोड़ रुपये में खरीद लिया। इस सौदे में सरकारी नियमों और कानूनों को ताक पर रखने के गंभीर आरोप लगे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि यह जमीन ‘महार वतन’ श्रेणी की थी, जिसे सरकार की अनुमति के बिना न खरीदा जा सकता है और न बेचा जा सकता है।
विवाद मीडिया में आने के बाद यह लैंड डील आनन-फानन में रद्द कर दी गई। विपक्ष ने इस पूरे मामले में करोड़ों के गोलमाल का आरोप लगाते हुए डिप्टी सीएम अजित पवार के इस्तीफे की मांग की है, जिससे मुंबई से दिल्ली तक सियासी गरमाहट बढ़ गई है।
लैंड डील का घालमेल और एफआईआर
जिस जमीन को लेकर सवाल उठे हैं, उसे अमाडिया एंटरप्राइजेज नाम की कंपनी ने खरीदा था।
पार्थ पवार की हिस्सेदारी: अजित पवार के बेटे पार्थ पवार इस कंपनी में हिस्सेदार हैं।
एफआईआर: इस मामले में दर्ज एफआईआर में पार्थ पवार का नाम शामिल नहीं है, क्योंकि कहा जा रहा है कि वह रजिस्ट्रेशन कराने नहीं गए थे। हालांकि, कंपनी के दूसरे हिस्सेदार दिग्विजय पाटिल और जमीन बेचने का सौदा करने वाली शीतल तेजवानी का नाम एफआईआर में है।
स्टांप ड्यूटी का गोलमाल: आरोप है कि इस डील के रजिस्ट्रेशन के लिए नियमों के विपरीत जाकर सिर्फ 500 रुपये स्टांप ड्यूटी चुकाई गई, जबकि नियमों के हिसाब से यह राशि करीब 21 करोड़ रुपये बनती थी।
महार वतन की जमीन का विवाद
यह सबसे चौंकाने वाला तथ्य है कि खरीदी गई जमीन महार वतन की श्रेणी में आती है। ये वो जमीनें होती हैं, जिनका मालिकाना हक सरकार के पास होता है, और यह सिर्फ इस्तेमाल के लिए दलित महार परिवारों को दी जाती है। इस जमीन को बेचने के लिए किसी तरह की NOC नहीं ली गई थी।
आरोप है कि तहसीलदार सूर्यकांत येवले ने अवैध आदेश जारी कर सरकारी भूमि को निजी घोषित कर दिया, जिसके बाद पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर शीतल तेजवानी ने यह जमीन पार्थ पवार की कंपनी को बेची।
सरकार का एक्शन और जाँच
सियासी विवाद बढ़ने के बाद देवेंद्र फडणवीस सरकार ने तुरंत एक्शन लिया है:
निलंबन: इस मामले में 2 रेवेन्यू अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
डील रद्द: लैंड डील को रद्द कर दिया गया है।
जाँच कमेटी: मुख्यमंत्री फडणवीस ने अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खारगे की अध्यक्षता में हाईलेवल कमेटी बनाई है, जो सभी अनियमितताओं की जांच करेगी और 1 महीने में जांच रिपोर्ट सौंपेगी।
अजित पवार का दावा: डिप्टी सीएम अजित पवार ने खुद को इस सौदे से दूर रखते हुए कहा है कि उन्हें जानकारी मिलते ही उन्होंने मुख्यमंत्री से बात कर जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा कि पार्थ पवार की कंपनी ने न तो भुगतान किया है और न ही जमीन पर कब्जा लिया है।
सीएम फडणवीस का बयान: सीएम ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्री रद्द होने के बावजूद आपराधिक मामला समाप्त नहीं होगा और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विवाद के बाद पार्थ पवार की कंपनी को अब 42 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी देनी होगी।
सहयोगी दल के निशाने पर भी पवार
इस विवाद में अजित पवार को सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि सहयोगी दल के नेताओं जैसे बीजेपी नेता नारायण राणे और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के कटाक्षों का भी सामना करना पड़ रहा है।

