27 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : महाराष्ट्र में गुरुवार को मुंबई समेत 29 नगर निगमों (Municipal Corporations) के लिए वोट डाले जाएंगे। इस महापर्व की तैयारियों के बीच एक नई तकनीक— PADU (डिप्लॉय प्रिंटिंग ऑक्सिलरी डिस्प्ले यूनिट) —ने विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव आयोग द्वारा EVM के साथ इस सहायक मशीन के इस्तेमाल के फैसले पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है। विशेष रूप से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने इस मशीन की गोपनीयता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

विवाद बढ़ता देख मुंबई नगर आयुक्त और चुनाव अधिकारी भूषण गगरानी ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की। आइए जानते हैं क्या है यह PADU मशीन और इसे लेकर हंगामा क्यों हो रहा है।

क्या है PADU मशीन? (Understanding PADU)

चुनाव आयोग के अनुसार, PADU का पूरा नाम Printing Auxiliary Display Unit है। यह एक छोटा सा अतिरिक्त उपकरण है जिसे EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की कंट्रोल यूनिट से जोड़ा जाता है।

  • मुख्य कार्य: यह मुख्य रूप से एक बैकअप डिस्प्ले डिवाइस है। यदि मतदान के दौरान कंट्रोल यूनिट (CU) की मुख्य स्क्रीन अचानक खराब हो जाए या बंद हो जाए, तो PADU मशीन उस पर दी जाने वाली जानकारी को प्रदर्शित करने के काम आती है।
  • VVPAT से अंतर: ध्यान देने वाली बात यह है कि PADU मशीन से VVPAT की तरह कोई कागज की रसीद नहीं निकलती। यह केवल डेटा को बड़ी स्क्रीन पर विजुअल (Visual) रूप में दिखाने में मदद करती है।
  • निर्माण: इन मशीनों का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी BHEL (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) ने किया है। मुंबई नगर निगम चुनाव के लिए फिलहाल 140 PADU यूनिट मंगाई गई हैं।

राज ठाकरे के तीखे सवाल: “अंधेरे में क्यों रखा गया?”

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव आयोग के इस फैसले को ‘अंधाधुंध’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नई मशीन के बारे में किसी भी राजनीतिक दल को पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।

राज ठाकरे ने कहा:

“ये किस तरह की मशीन है? यह कैसी दिखती है? अचानक चुनाव से पहले इसे लाने की क्या जरूरत थी? राजनीतिक दलों को बुलाकर इसे दिखाया क्यों नहीं गया? यह चुनाव है या कोई अफरा-तफरी का खेल? लोगों को समझना चाहिए कि परदे के पीछे किस तरह की राजनीति चल रही है।”

इसके साथ ही ठाकरे ने प्रचार की अवधि खत्म होने के बाद भी घर-घर जाकर प्रचार करने की अनुमति देने वाले नियम पर भी आयोग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल किया कि ये विशेष नियम केवल नगर निगम चुनाव के लिए ही क्यों बनाए गए हैं।

PADU मशीन: चुनाव आयोग की सफाई vs विपक्ष की आशंका

बिंदुचुनाव आयोग का पक्ष (भूषण गगरानी)विपक्ष की आशंका (राज ठाकरे/अन्य)
जरूरतकंट्रोल यूनिट खराब होने पर बैकअप के लिए।चोरी-छिपे नई तकनीक जोड़ना संदिग्ध है।
पारदर्शितायह केवल एक डिस्प्ले यूनिट है, डेटा सुरक्षित है।राजनीतिक दलों को ट्रायल में शामिल नहीं किया गया।
उपयोगआपातकालीन स्थिति में ही इस्तेमाल होगी।चुनाव परिणामों को प्रभावित करने का उपकरण हो सकता है।
रसीदइसमें से कोई पर्ची या रसीद नहीं निकलेगी।बिना रसीद के डेटा की सत्यता की जांच मुश्किल है।

प्रशासन की तैयारी: 140 यूनिट तैनात

मुंबई नगर आयुक्त भूषण गगरानी ने स्पष्ट किया कि PADU मशीनों का उपयोग तभी किया जाएगा जब कोई तकनीकी आपात स्थिति उत्पन्न होगी। उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया को अधिक ‘दृश्यमान’ (Visible) बनाने के लिए यह एक अतिरिक्त सुरक्षा परत है। मुंबई के विभिन्न केंद्रों के लिए 140 यूनिट्स का कोटा आवंटित किया गया है, जो किसी भी तकनीकी विफलता की स्थिति में बैकअप के तौर पर तैयार रहेंगी।

लोकतंत्र के इस उत्सव में ‘PADU’ मशीन का प्रवेश तकनीकी सुधार है या कोई बड़ी गड़बड़ी, यह तो चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, राज ठाकरे के कड़े रुख ने मतदाताओं के मन में जिज्ञासा और संदेह दोनों पैदा कर दिए हैं। कल होने वाला मतदान अब केवल उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला नहीं करेगा, बल्कि नई वोटिंग तकनीकों की विश्वसनीयता की परीक्षा भी लेगा।

By News Scoop Desk

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