27 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : “अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा…” करीब 46 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मुंबई के जिस अरब सागर के तट से यह भविष्यवाणी की थी, वह आज 16 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र की राजनीति में हकीकत बनकर उभरी है। महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीतिक दिशा को पूरी तरह बदल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति ‘पंचायत से पार्लियामेंट’ तक जनता का जो भरोसा है, उसकी एक और बड़ी किस्त महाराष्ट्र से प्राप्त हुई है।

इस निकाय चुनाव में बीजेपी गठबंधन (महायुति) ने न केवल अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि विपक्ष के उन किलों को भी ढहा दिया है जिन्हें ‘अजेय’ माना जाता था। मुंबई से लेकर नागपुर और पुणे से लेकर नासिक तक, पूरे महाराष्ट्र में भगवा लहर साफ नजर आ रही है।

बीएमसी (BMC) में पहली बार बीजेपी का मेयर तय

इस चुनाव की सबसे बड़ी खबर देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से आई है। दशकों तक शिवसेना (ठाकरे परिवार) का गढ़ रही बीएमसी में पहली बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

  • दशकों पुराना किला ढहा: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का दो दशक बाद एक साथ आना भी बीजेपी की रणनीति के आगे फीका पड़ गया।
  • नया इतिहास: अब मुंबई में बीजेपी का मेयर बनना तय माना जा रहा है, जो मुंबई की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है।

पवार और ठाकरे के गढ़ों का पतन

महाराष्ट्र की राजनीति में यह चुनाव ‘दिग्गजों के पतन’ के रूप में याद किया जाएगा। सहकारी से सरकारी तक का फॉर्मूला चलाने वाले शरद पवार और अजित पवार के एकजुट होने के बावजूद पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे इलाकों में बीजेपी को रोकना मुमकिन नहीं हो सका।

इसी तरह, मराठी मानुष और क्षेत्रीय अस्मिता के नाम पर दशकों तक मुंबई और ठाणे पर राज करने वाला ठाकरे परिवार अपने किलों को बचाने में नाकाम रहा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को ‘रिकॉर्ड तोड़ जनादेश’ करार देते हुए कहा कि जनता ने विकास की भाषा को चुना है।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026: एक नजर में

विवरणआंकड़े/जानकारी
कुल नगर निगम29
बीजेपी गठबंधन की जीत25
प्रमुख जीतमुंबई (BMC), पुणे, नागपुर, नासिक, सोलापुर
मुख्य मुद्दाविकास, महिला सुरक्षा, 29 सूत्रीय घोषणापत्र
विपक्ष का प्रदर्शनगढ़ बचाने में नाकाम (ठाकरे, पवार और कांग्रेस)

रिस्क टेकिंग और हाइपर-लोकल रणनीति

2024 के लोकसभा चुनावों में लगे झटके के बाद बीजेपी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। प्रधानमंत्री मोदी के ‘रिस्क लेने’ के मंत्र को जमीन पर उतारा गया।

  1. मुद्दों पर फोकस: अस्मिता की राजनीति के जवाब में बीजेपी ने सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सुरक्षा जैसे हाइपर-लोकल मुद्दों को प्रमुखता दी।
  2. संगठनात्मक मजबूती: पन्ना प्रमुख से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक, बीजेपी ने माइक्रो-मैनेजमेंट के जरिए विपक्ष के ‘जातीय और क्षेत्रीय’ समीकरणों को ध्वस्त कर दिया।

राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव

महाराष्ट्र की इस बड़ी जीत की गूंज केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। इसका मनोवैज्ञानिक असर आने वाले समय में पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों के चुनावों पर पड़ना तय है। बीजेपी ने यह संदेश दे दिया है कि उसके खिलाफ बनाए गए वैचारिक समझौते या ‘महागठबंधन’ के प्रयोग अब जनता के बीच काम नहीं कर रहे हैं। हिंदुत्व, सुशासन और मजबूत नेतृत्व के त्रिकोण ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है।

महाराष्ट्र के इन परिणामों ने साफ कर दिया है कि राज्य में अब बीजेपी ही राजनीति की मुख्य धुरी है। ‘मराठी अस्मिता’ बनाम ‘विकास और हिंदुत्व’ की इस लड़ाई में फिलहाल कमल ने अपनी चमक से विरोधियों को पीछे छोड़ दिया है।

By News Scoop Desk

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