न्यूज स्कूप : भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का पर्व सूर्य देव की उपासना और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे उत्तरायण कहा जाता है। उत्तर भारत में इस पर्व को ‘खिचड़ी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन खिचड़ी बनाना, उसे सूर्य देव को अर्पित करना और गरीबों में दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
खिचड़ी केवल एक सुपाच्य भोजन नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे ज्योतिषीय कारण और लोक मान्यताएं छिपी हैं। माना जाता है कि खिचड़ी के घटकों का संबंध विभिन्न ग्रहों से है, और इसे खाने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खिचड़ी के प्रत्येक तत्व का संबंध किसी न किसी ग्रह से होता है:
- चावल: चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है।
- उड़द दाल: शनि देव का प्रतीक है। मकर संक्रांति पर काली उड़द दाल की खिचड़ी खाने से शनि दोष कम होता है।
- हल्दी: बृहस्पति (गुरु) ग्रह से संबंधित है।
- हरी सब्जियां (मटर, मिर्च): बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- घी: सूर्य और मंगल की ऊर्जा का प्रतीक है।
यही कारण है कि मकर संक्रांति पर ‘पंचमेल’ या मिली-जुली खिचड़ी खाने से कुंडली के नवग्रह संतुलित होते हैं।
स्वादिष्ट और खुशबूदार खिचड़ी बनाने के लिए आपको इन सामग्रियों की आवश्यकता होगी:
- मुख्य: नए चावल (1 कप), काली उड़द दाल (1/2 कप)।
- सब्जियां: हरे मटर, फूलगोभी, बारीक कटे आलू और टमाटर।
- तड़का: देसी घी, जीरा, हींग (एक चुटकी), बारीक कटी हरी मिर्च और अदरक।
- मसाले: हल्दी पाउडर, नमक (स्वादानुसार) और गरम मसाला।
- गार्निशिंग: हरा धनिया और ऊपर से अतिरिक्त देसी घी।
- तैयारी: सबसे पहले चावल और उड़द दाल को अच्छी तरह धो लें और इसे कम से कम 15-20 मिनट के लिए पानी में भिगो दें। इससे खिचड़ी नरम और दानेदार बनती है।
- तड़का लगाएं: प्रेशर कुकर में 2 बड़े चम्मच देसी घी गरम करें। घी गरम होने पर इसमें जीरा और हींग डालें। अब बारीक कटी मिर्च और अदरक डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें।
- सब्जियां भूनें: कुकर में आलू, गोभी और मटर डालें। इसमें हल्दी पाउडर डालकर 2 मिनट तक चलाएं। इसके बाद कटे हुए टमाटर डालें।
- दाल-चावल का मेल: अब भिगोए हुए चावल और दाल का पानी निकालकर कुकर में डाल दें। सभी मसालों के साथ इन्हें 1 मिनट तक अच्छे से मिलाएं ताकि घी की कोटिंग हो जाए।
- पकाना: स्वादानुसार नमक और आवश्यकतानुसार पानी (दाल-चावल की मात्रा का करीब 3-4 गुना) मिलाएं। कुकर का ढक्कन बंद करें और 3 से 4 सीटी आने तक पकाएं।
- सर्विंग: कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें। ढक्कन खोलें और ऊपर से थोड़ा गरम मसाला और हरा धनिया डालें।
मकर संक्रांति पर अन्नदान महादान माना जाता है। इस दिन कच्ची खिचड़ी (चावल, दाल, नमक और घी का पैकेट) किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को दान करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। मान्यता है कि खिचड़ी दान करने से सूर्य देव के साथ-साथ शनि देव की कृपा भी प्राप्त होती है।
मकर संक्रांति की यह पारंपरिक खिचड़ी सेहत के लिए जितनी फायदेमंद है, आध्यात्मिक रूप से उतनी ही महत्वपूर्ण। इस बार उत्तरायण के पावन अवसर पर शुद्ध देसी घी वाली खिचड़ी बनाएं, सूर्य देव को भोग लगाएं और अपनों के साथ इस उत्सव का आनंद लें।
