28 Feb 2026, Sat
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Margashirsha Cold Moon: आज साल का आखिरी Supermoon, पृथ्वी से 357,000 Km की दूरी पर दिखेगा; जानें शीत पूर्णिमा का धार्मिक महत्व और अनुष्ठान

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न्यूज स्कूप : आज यानी गुरुवार 4 दिसंबर 2025, वर्ष की आखिरी महत्वपूर्ण खगोलीय घटना का साक्षी बनने जा रहा है। हिंदू धर्म में इसे मार्गशीर्ष पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, जिसे अंग्रेजी में ‘कोल्ड मून’ (शीत चंद्रमा) भी कहा जाता है। इस पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह शीतकालीन संक्रांति (Winter Solstice, 21 दिसंबर) के बेहद करीब आती है, जिसे सर्दियों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

साल का तीसरा और दूसरा सबसे नज़दीकी सूपरमून

पृथ्वी से चंद्रमा की निकटता के कारण यह पूर्णचंद्र एक सूपरमून (Super Moon) भी होगा। Earthsky की रिपोर्ट के अनुसार, यह वर्ष 2025 का तीसरा सूपरमून होने वाला है।

  • निकटता: आज चंद्रमा पृथ्वी से करीब 357,000 किलोमीटर की दूरी पर होगा, जिस वजह से यह इस वर्ष का दूसरा सबसे नजदीकी पूर्णचंद्र है। सूपरमून की घटना तब घटित होती है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे करीब होता है, जिससे यह सामान्य से थोड़ा बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई देता है।

मौसम की स्पष्ट स्थिति के आधार पर, यह मार्गशीर्ष पूर्णिमा का सूपरमून भारत में 4-5 दिसंबर, 2025 की रात अपने पूरे चरण पर दृश्यमान होगा। सूर्यास्त के लगभग 20-30 मिनट बाद चंद्रोदय भारत की आकाश में दिखाई देगा।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

सनातन धर्म में पूर्णिमा का पवित्र अवसर आत्म-चिंतन और संकल्पों को मजबूत करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • त्याग का दिन: यह दिन आध्यात्मिकता के लिहाज से उन चीजों को त्यागने के लिए शुभ है, जो अब आपके जीवन में सकारात्मक योगदान नहीं दे रही हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा: माना जाता है कि पूर्णिमा की सकारात्मक ऊर्जा आपके पक्के इरादों को अंजाम देने और अपनी इच्छाओं को ब्रह्मांड में जाहिर करने के लिए सबसे सही मानी जाती है।
  • पूजा: पूर्णिमा पर व्रत रखने और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने की सलाह दी जाती है। विधि-विधान और ईमानदारी से व्रत रखा जाए, तो समृद्धि, खुशहाली, शांति और सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

इच्छाओं की पूर्ति के लिए विशेष अनुष्ठान

मार्गशीर्ष पूर्णिमा की शक्तिशाली ऊर्जा का उपयोग इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी किया जा सकता है।

ब्रह्मांड का नियम: याद रखें, आप जैसा सोचते हैं और जिस पर विश्वास करते हैं, ब्रह्मांड आपको वैसा ही परिणाम देता है।

मोमबत्ती अनुष्ठान: इस विशेष अनुष्ठान को करने के लिए, एक सफेद मोमबत्ती जलाकर चांद की रोशनी में बैठ जाएं।

संकल्प और विश्वास: मन को शांत कर अपनी इच्छाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें। ऐसी कल्पना करें कि आपके द्वारा बोली गई इच्छा पूर्ण हो गई है। गहरी सांस लेकर अपनी इच्छाशक्ति पर विश्वास करें और मन में किसी भी तरह का संदेह न रखें।

By News Scoop Desk

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