न्यूज स्कूप : उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ एक 8 से 10 वर्षीय बच्चा अनियंत्रित होकर एक गहरे नाले में गिर गया। घटना सोमवार, 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) दोपहर की है और तब से लेकर अब तक लगभग 18 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन बच्चे का कोई पता नहीं चल सका है। प्रशासन और राहत बचाव की टीमें लगातार बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए जद्दोजहद कर रही हैं।
यह पूरा मामला मेरठ के टीपी नगर (TP Nagar) थाना क्षेत्र का है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बच्चा नाले के किनारे कूड़ा बीन रहा था, तभी अचानक पैर फिसलने के कारण वह गहरे और तेज बहाव वाले नाले में समा गया।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है। टीपी नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण मिश्रा ने बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश करते हुए खुद नाले की गहराई में उतरकर बच्चे को तलाशने की कोशिश की।
- रेस्क्यू टीम: पुलिस के साथ-साथ नगर निगम और राहत दलों की संयुक्त टीम मौके पर तैनात है।
- मशीनों का इस्तेमाल: नाले के भीतर जमा सिल्ट और मलबे को हटाने के लिए जेसीबी (JCB) मशीनों की मदद ली जा रही है। अलग-अलग स्थानों पर नाले की खुदाई कर बच्चे को खोजने का प्रयास किया जा रहा है।
- निगरानी: पुलिस ने नाले के बहाव की दिशा में कई किलोमीटर तक अलग-अलग टीमें तैनात की हैं, ताकि यदि बच्चा बहाव के साथ आगे निकला हो, तो उसे तुरंत रिकवर किया जा सके।
इस हादसे की सबसे अजीब और चिंताजनक बात यह है कि रेस्क्यू ऑपरेशन को 18 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक बच्चे का कोई भी परिजन या परिवार का सदस्य मौके पर नहीं पहुँचा है।
- पहचान: बच्चे की उम्र लगभग 8-10 वर्ष बताई गई है। वह संभवतः निर्धन परिवार से है जो कूड़ा बीनकर अपना गुजारा करता था।
- पुलिस का रुख: पुलिस प्रशासन का कहना है कि परिवार सामने आए या न आए, उनका पहला लक्ष्य मासूम की जान बचाना है। देर रात और मंगलवार (27 जनवरी) सुबह भी यह अभियान बिना रुके जारी रहा।
| विवरण | जानकारी |
| हादसे का समय | सोमवार, 26 जनवरी (दोपहर) |
| स्थान | टीपी नगर थाना क्षेत्र, मेरठ |
| बच्चे की उम्र | लगभग 8 से 10 वर्ष |
| अभियान की अवधि | 18 घंटे से अधिक |
| रेस्क्यू में शामिल | पुलिस, नगर निगम, डायल 112, राहत दल |
मेरठ की यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और खुले नालों के खतरे को एक बार फिर उजागर करती है। 18 घंटे का समय बीत जाने के बाद बच्चे के बचने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं, लेकिन प्रशासन की तत्परता और इंस्पेक्टर अरुण मिश्रा का खुद नाले में उतरना यह दर्शाता है कि हर एक जान की कीमत सर्वोच्च है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही बच्चे का सुराग मिल पाएगा।
