द लोकतंत्र : हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष या अगहन महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी का महत्व स्वयं भगवान कृष्ण ने बताया है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इस एकादशी को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
इस वर्ष मोक्षदा एकादशी का व्रत सोमवार, 1 दिसंबर 2025 को एक अत्यंत शुभ संयोग में मनाया जाएगा। स्मार्त और वैष्णव दोनों मतों के अनुसार, इसी दिन एकादशी का पुण्यकाल रहेगा।
मोक्षदा एकादशी व्रत का प्रभाव इतना गहरा होता है कि यह ना सिर्फ व्रत करने वाले साधक को मोक्ष (मुक्ति) दिलाता है, बल्कि इसके पुण्य से साधक के पितरों (पूर्वजों) को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सौभाग्य, समृद्धि और भगवान लक्ष्मी-नारायण की विशेष कृपा प्रदान करता है।
व्रत-पूजन के साथ ही इस दिन दीपक से जुड़े कुछ दिव्य उपाय (Deepak Upay) करने की परंपरा है, जिन्हें जीवन से कष्ट निवारण और शुभता वृद्धि के लिए अचूक माना जाता है।
मोक्षदा एकादशी के पावन दिन पर, अपनी मनोकामनाओं और पितरों के आशीर्वाद के लिए इन 4 स्थानों पर दीपक जरूर जलाएं:
- स्थान: अपने घर के मुख्य द्वार (Mukhya Dwar) पर शाम के समय एक दीपक अवश्य जलाएं।
- लाभ: यह दिव्य दीप आपके घर-परिवार के लिए रक्षा कवच की तरह काम करता है। मान्यता है कि इससे घर के भीतर नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है, और सकारात्मकता बनी रहती है।
- स्थान: मोक्षदा एकादशी पर सुबह और शाम दोनों ही समय तुलसी के पौधे के पास एक शुद्ध घी का दीपक जरूर जलाएं।
- लाभ: तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है। तुलसी के पास दीप जलाने से घर में धन, सुख और समृद्धि का वास होता है, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।
- स्थान: मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंदिर में जाकर एक घी या तेल का दीपक जलाएं।
- लाभ: दीपक जलाने के बाद भगवान से अपने जीवन में चल रही परेशानियों और संकटों को दूर करने की कामना करें। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन के दुख कम होते हैं।
लाभ: दीप जलाकर पितरों की मुक्ति और शांति के लिए प्रार्थना करें। इससे पितृ प्रसन्न होकर आपको आशीर्वाद देते हैं, और कुंडली में मौजूद पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।
स्थान: मोक्षदा एकादशी का दिन पितृ पूजन के लिए विशेष होता है। हिंदू धर्म में पीपल वृक्ष में पितरों और देवताओं का वास बताया गया है। इसलिए इस दिन पीपल वृक्ष के नीचे भी एक दीप जलाएं।
