न्यूज़ स्कूप डेस्क : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए को मिली प्रचंड जीत के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया तेज़ हो गई है। चुनाव परिणाम के तीन दिन बाद ही राजनीतिक घटनाक्रम रफ़्तार पकड़ चुका है। रविवार को जहां लगातार बैठकों का दौर चलता रहा, वहीं सोमवार को इसे निर्णायक मोड़ देने की तैयारी कर ली गई है। नई सरकार गठन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और पूरा प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
रविवार को निर्वाचन आयोग ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को सभी 243 नव-निर्वाचित विधायकों की सूची सौंप दी। इसके साथ ही सोमवार (17 नवंबर) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अहम कैबिनेट बैठक बुलाई है, जिसमें मंत्रिमंडल भंग करने के प्रस्ताव पर मुहर लगने की पूरी संभावना है। बैठक सुबह 11:30 बजे मुख्य सचिवालय स्थित कैबिनेट कक्ष में होगी। निर्णय के तुरंत बाद नीतीश कुमार राजभवन जाकर राज्यपाल को औपचारिक रूप से इस्तीफा सौंपेंगे। इसके बाद जल्द ही नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि बैठक के बाद सूचना एवं जन संपर्क विभाग को प्रेस कॉन्फ्रेंस की व्यवस्था करनी होगी। यह संकेत है कि सोमवार का दिन बिहार की राजनीति में बड़ा और निर्णायक रहने वाला है। नई सरकार की संरचना, मंत्रीपरिषद का स्वरूप और एनडीए के भीतर शक्ति-संतुलन को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
उधर पटना प्रशासन ने भी शपथ ग्रहण की तैयारियों को देखते हुए बड़े कदम उठाए हैं। ज़िलाधिकारी ने 17 से 20 नवंबर तक गांधी मैदान में आम लोगों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश में कहा गया है कि मैदान में बड़े कार्यक्रम की तैयारी को देखते हुए सुरक्षा कारणों से यह अस्थायी रोक लगाई गई है। माना जा रहा है कि शपथ ग्रहण समारोह इसी स्थल पर आयोजित किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक नई सरकार का शपथ ग्रहण 19 या 20 नवंबर को होने की संभावना है। इस भव्य आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह समारोह बिहार की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जाएगा।
नई सरकार के गठन के साथ ही अब निगाहें इस बात पर हैं कि नीतीश कुमार नई कैबिनेट में किन चेहरों को जगह देंगे और एनडीए के भीतर विभागों का बंटवारा किस तरह होगा। ऐतिहासिक जीत के बाद एनडीए पर जन अपेक्षाओं का दबाव और ज़िम्मेदारी दोनों बढ़ गई हैं। आने वाले 48 घंटे बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं।
