न्यूज स्कूप : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गुजरात में चल रहे एक खतरनाक ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन (कट्टरपंथ) गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 5 मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। ये आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) की जहरीली विचारधारा को सोशल मीडिया के जरिए फैलाने और भारतीय युवाओं को लोकतांत्रिक सरकार के खिलाफ भड़काने के दोषी पाए गए हैं।
शनिवार, 17 जनवरी 2026 को एनआईए द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इन आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
NIA ने जिन पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश की है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- मोहम्मद फर्दीन
- कुरैशी सैफुल्ला
- मोहम्मद फैक (पुरानी दिल्ली का निवासी, मुख्य भूमिका)
- जीशान अली
- शमा परवीन (बेंगलुरु की निवासी)
NIA की गहन जांच में इन आरोपियों के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का सनसनीखेज खुलासा हुआ है:
- भड़काऊ कंटेंट: ये लोग इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ‘जिहाद’, ‘हिंसा’ और ‘गजवा-ए-हिंद’ से जुड़े वीडियो, फोटो और पोस्ट शेयर करते थे।
- युवाओं को निशाना: इनका मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन ग्रुप्स के जरिए भोले-भाले युवाओं को कट्टरपंथ की ओर खींचना और उन्हें भारत सरकार के खिलाफ हिंसक बगावत के लिए तैयार करना था।
- खिलाफत और शरिया: आरोपियों के पोस्ट्स में भारतीय लोकतंत्र को उखाड़ फेंकने और शरिया कानून व खिलाफत लागू करने की बातें की जाती थीं।
यह मामला सबसे पहले गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने पकड़ा था। एटीएस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से डिजिटल डिवाइस (मोबाइल, लैपटॉप) के साथ-साथ खतरनाक हथियार भी बरामद किए थे।
- हथियारों की बरामदगी: आरोपियों के पास से एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, कारतूस और एक लंबी तलवार मिली थी, जिससे संकेत मिलता है कि ये केवल ऑनलाइन ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी हिंसा की तैयारी में थे।
इस मामले में बेंगलुरु की रहने वाली शमा परवीन की भूमिका काफी संदेहास्पद पाई गई है।
- विदेशी संपर्क: NIA को शमा के फोन से पाकिस्तान से जुड़े कई कॉन्टैक्ट नंबर मिले हैं। जांच में सामने आया कि वह एक पाकिस्तानी नागरिक सुमेर अली के साथ नियमित संपर्क में थी।
- कट्टरपंथी साहित्य: उसके पास से AQIS के वीडियो और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाली प्रतिबंधित किताबें भी मिली हैं। वह कई ऐसे गुप्त ग्रुप्स में सक्रिय थी जहां अल-कायदा की विचारधारा को प्रमोट किया जाता था।
| विवरण | जानकारी |
| एजेंसी | राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) |
| संगठन | अल-कायदा (AQIS) |
| कुल आरोपी | 5 |
| प्रमुख धाराएं | UAPA, BNS, आर्म्स एक्ट |
| बरामदगी | पिस्टल, तलवार, डिजिटल सबूत, पाक नंबर |
NIA की यह चार्जशीट भारत में फैल रहे ‘डिजिटल टेरर’ के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी है। जांच एजेंसी का कहना है कि वे इन आरोपियों के पूरे नेटवर्क और फंडिंग सोर्स को ट्रैक कर रहे हैं। फिलहाल, डिजिटल फूटप्रिंट्स और फॉरेंसिक जांच के जरिए और भी नए सबूत जुटाए जा रहे हैं।
