न्यूज स्कूप : उत्तर प्रदेश के नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस और प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। मंगलवार को ग्रेटर नोएडा की नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने इस मामले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए नामजद बिल्डर अभय कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया। अभय कुमार सिंह ‘एमजेड विसटाउन’ (MZ Vistatown) का मालिक है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद गठित तीन सदस्यीय SIT (विशेष जांच टीम) ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिया है। इस हादसे ने नोएडा के हाई-राइज सोसायटियों में बिल्डरों की लापरवाही और ड्रेनेज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
युवराज के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर पुलिस ने दो बड़े बिल्डरों— एमजेड विसटाउन और लोटस ग्रीन के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की थी।
- लापरवाही का आरोप: जांच में प्राथमिक रूप से बिल्डरों की घोर लापरवाही सामने आई है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते बारिश का पानी बेसमेंट में भर गया, जो युवराज की मौत का कारण बना।
- नोएडा अथॉरिटी पर भी एक्शन: इस मामले में नोएडा अथॉरिटी के संबंधित जेई (JE) को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि अभय सिंह की गिरफ्तारी के बाद अन्य आरोपियों पर भी जल्द शिकंजा कसा जाएगा।
मंगलवार दोपहर को NDRF और गोताखोरों की टीम ने एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया।
- चुनौतीपूर्ण सर्च: घटना वाले दिन केवल युवराज का शव मिल पाया था, लेकिन उनकी कार का पता नहीं चल सका था।
- सफलता: करीब तीन घंटे की मशक्कत और नाव के जरिए पानी के अंदर तलाशी लेने के बाद, गोताखोरों ने युवराज की कार को ढूंढ निकाला।
- फंसी हुई स्थिति: बताया जा रहा है कि कार दो बेसमेंट के बीच के संकरे हिस्से में फंसी हुई है, जिसे अब भारी मशीनों की मदद से बाहर निकालने की तैयारी की जा रही है।
सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एडीजी जोन (मेरठ) भानु भास्कर के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है।
- टीम के सदस्य: इस टीम में मेरठ मंडल के कमिश्नर और पीडब्ल्यूडी (PWD) के चीफ इंजीनियर भी शामिल हैं।
- डेडलाइन: एसआईटी को 5 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपनी है। टीम इस बात की जांच कर रही है कि बेसमेंट में पानी भरने के बावजूद वहां वाहन ले जाने की अनुमति कैसे थी और ड्रेनेज सिस्टम क्यों फेल हुआ।
युवराज मेहता की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम और बिल्डरों की मिलीभगत का परिणाम है। बिल्डर अभय सिंह की गिरफ्तारी इस दिशा में पहला कदम है। अब देखना यह है कि एसआईटी की रिपोर्ट में किन बड़े नामों का खुलासा होता है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
