न्यूज स्कूप : सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित ऐतिहासिक लाहौर किले (Lahore Fort) में भगवान राम के पुत्र लव (लोह) को समर्पित ‘लोह मंदिर’ का संरक्षण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। वॉल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी (WCLA) ने घोषणा की है कि इस ऐतिहासिक मंदिर को अब आम जनता और पर्यटकों के दर्शन के लिए खोल दिया गया है।
यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि दक्षिण एशिया के प्राचीन इतिहास की कड़ियों को जोड़ने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। संरक्षण का यह कार्य आगा खान कल्चरल सर्विस-पाकिस्तान के तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ है।
हिंदू मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार, लाहौर शहर का गहरा संबंध रामायण काल से है:
- लवपुरी से लाहौर: माना जाता है कि लाहौर को भगवान राम के पुत्र लव (Luv) ने बसाया था और इसका प्राचीन नाम लवपुरी था।
- राजधानी: जब भगवान राम ने वनप्रस्थ जाने का निर्णय लिया, तब उन्होंने लव को पंजाब क्षेत्र का शासन सौंपा था। लव ने लवपुरी को अपनी राजधानी बनाया, जो कालान्तर में ‘लाहौर’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
- मंदिर की बनावट: लाहौर किले के भीतर स्थित यह मंदिर आपस में जुड़े कई कमरों का एक समूह है, जो खुले आकाश के नीचे बना है। इसे स्थानीय स्तर पर ‘लावा मंदिर’ भी कहा जाता है।
WCLA की प्रवक्ता तानिया कुरैशी के अनुसार, इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य लाहौर किले की बहु-सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने लाना है।
- विविध विरासत: किले के भीतर मुगल काल की मस्जिदें, सिख और हिंदू मंदिर, और ब्रिटिश दौर की इमारतें एक साथ मौजूद हैं।
- अन्य स्मारकों का जीर्णोद्धार: लोह मंदिर के साथ-साथ सिख काल के हम्माम (स्नानागार) और महाराजा रणजीत सिंह के अथदारा पवेलियन को भी संरक्षित किया गया है।
- तकनीकी बारीकी: जीर्णोद्धार के दौरान प्राचीन वास्तुकला को बनाए रखने के लिए विशेष आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया गया है।
| स्मारक का नाम | काल | महत्व |
| लोह मंदिर | प्राचीन/सिख काल | भगवान लव को समर्पित, लाहौर की जड़ें |
| अथदारा पवेलियन | सिख काल (रणजीत सिंह) | न्याय और दरबार का केंद्र |
| बादशाही मस्जिद | मुगल काल | स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना |
| हम्माम | सिख काल | प्राचीन स्नानागार प्रणाली |
लाहौर किले का इतिहास सिख साम्राज्य (1799-1849) के दौरान अपने चरम पर था। इस गौरवशाली इतिहास को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए WCLA ने अमेरिका स्थित सिख शोधकर्ता डॉ. तरुंजित सिंह बुटालिया से एक विशेष गाइडबुक लिखवाई है, जिसका नाम “Lahore Fort during the Sikh Empire” है।
डॉ. बुटालिया के अनुसार, यह किला लगभग 50 वर्षों तक सिख सत्ता का केंद्र रहा और आज भी दुनिया भर के सिख समुदाय के लिए भावनात्मक रूप से बहुत महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार उनके पूर्वज भी इसी दरबार में उच्च पदों पर आसीन थे।
लोह मंदिर का संरक्षण केवल एक इमारत की मरम्मत नहीं है, बल्कि उस साझी विरासत को सम्मान देना है जो सरहदों के पार आज भी जीवित है। मार्च 2025 में बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला की यात्रा ने भी इस स्थल की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया था। अब इसे सार्वजनिक रूप से खोले जाने से इतिहास प्रेमियों और श्रद्धालुओं को अपनी जड़ों को करीब से देखने का मौका मिलेगा।
