20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने का विशेष विधान है। साल 2025 की आखिरी मासिक शिवरात्रि पौष मासिक शिवरात्रि होगी, जो गुरुवार, 18 दिसंबर को मनाई जाएगी। शिव पुराण में इस व्रत के महत्व को विस्तार से बताया गया है।

मान्यता है कि देवी लक्ष्मी, इन्द्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती तथा रति सहित कई देवियों ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था, जिससे उन्हें मनोवांछित फल प्राप्त हुए थे।

पौष मासिक शिवरात्रि 2025 मुहूर्त

शिव पूजा हमेशा रात्रि के निशिता काल में करना सबसे शुभ माना जाता है।

विवरणसमय
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ18 दिसंबर 2025, सुबह 2:32 मिनट पर
चतुर्दशी तिथि समापन19 दिसंबर 2025, सुबह 4:49 मिनट पर
शुभ पूजा मुहूर्त (निशिता काल)रात 11:51 से देर रात 12:45 तक (18 दिसंबर)

राहु-केतु के अशुभता दूर करने का विशेष उपाय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु (Rahu Ketu) की महादशा चल रही हो या अशुभ प्रभाव के कारण जीवन में दुखों का अंबार लगा हो, उनके लिए मासिक शिवरात्रि का व्रत अत्यंत प्रभावी होता है। शिवजी की पूजा करने से इन दोनों छाया ग्रहों से जनित दोषों से मुक्ति मिलती है।

विशेष अनुष्ठान:

  1. अभिषेक: मासिक शिवरात्रि के दिन निशिता काल मुहूर्त में भगवान शिवजी को दुर्वा और कुश में जल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें।
  2. मंत्र जाप: इस उपाय के साथ-साथ, ‘शिव पंचाक्षरी मंत्र’ ($\text{ओम् नमः शिवाय}$) का कम से कम 11 माला जाप करें।

ऐसी मान्यता है कि इस उपाय और मंत्र जाप से राहु-केतु जनित हर तरह का दोष समाप्त होता है और जीवन में शांति व समृद्धि आती है।

असंभव को संभव करने वाला व्रत

मासिक शिवरात्रि के व्रत को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को विधि-विधान से करने पर भगवान शिव की कृपा से किसी भी प्रकार के कठिन और असम्भव कार्य को भी पूर्ण किया जा सकता है। यह व्रत आपको आत्मिक शक्ति प्रदान करता है और आपकी इच्छाशक्ति को मजबूत करता है।

मासिक शिवरात्रि व्रत विधि (Vrat Vidhi)

मासिक शिवरात्रि का व्रत अत्यंत निष्ठा और सादगी से किया जाता है:

  • जागरण: संभव हो तो रात्रि जागरण करें और शिव कथाओं का श्रवण करें।
  • संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प (Sankalp) लें।
  • अभिषेक: घर या मंदिर में शिवलिंग का जलाभिषेक करें। बेलपत्र, भांग, धतूरा, अक्षत, फूल और फल जैसी शुभ सामग्रियां अर्पित करें।
  • रात्रि पूजा: शाम को, विशेष रूप से निशिता काल (शुभ मुहूर्त) के दौरान, पुनः पूजा करें।
  • मंत्र जाप: रुद्राक्ष की माला से भगवान शिव के मंत्र, विशेषकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।
  • भोग: पूजा में खीर, मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाएं।

By News Scoop Desk

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