14 Apr 2026, Tue
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न्यूज स्कूप : हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का 12वां और अंतिम महीना फाल्गुन (Phalgun) आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वह समय है जब शीत ऋतु विदा लेती है और वसंत का आगमन प्रकृति में नई ऊर्जा और रंग भर देता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में फाल्गुन मास की शुरुआत 2 फरवरी से हो रही है, जिसका समापन 3 मार्च को होगा।

फाल्गुन का महीना भगवान शिव, श्री कृष्ण और दान-पुण्य के लिए विशेष माना गया है। इसी माह में महाशिवरात्रि जैसा महापर्व आता है, जो शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है, वहीं महीने का अंत होली के रंगों के साथ होता है।

फाल्गुन 2026 के प्रमुख व्रत-त्योहार (कैलेंडर)

फाल्गुन के महीने में कई महत्वपूर्ण तिथियां पड़ती हैं। यहाँ देखें प्रमुख त्योहारों की पूरी सूची:

  • 02 फरवरी: फाल्गुन मास का शुभारंभ
  • 07 फरवरी: यशोदा जयंती (मैया यशोदा का जन्मोत्सव)
  • 09 फरवरी: जानकी जयंती (माता सीता का प्राकट्य दिवस)
  • 13 फरवरी: विजया एकादशी (संकटों पर विजय दिलाने वाला व्रत)
  • 15 फरवरी: महाशिवरात्रि (भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह उत्सव)
  • 17 फरवरी: फाल्गुन अमावस्या (पितृ तर्पण और दान के लिए शुभ)
  • 19 फरवरी: फुलेरा दूज (अबूझ मुहूर्त और फूलों की होली)
  • 24 फरवरी: होलाष्टक प्रारंभ (शुभ कार्यों पर रोक)
  • 27 फरवरी: आंवला एकादशी (आमलकी एकादशी)
  • 03 मार्च: होलिका दहन
  • 04 मार्च: होली (धुलेंडी)

फाल्गुन मास का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

हिंदू धर्म में फाल्गुन को खुशियों का महीना कहा गया है। इसके पीछे कई विशेष कारण हैं:

  1. ऋतु परिवर्तन: इस महीने में सर्दी कम होने लगती है और मौसम सुहावना हो जाता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव मन और स्वास्थ्य पर पड़ता है।
  2. चंद्रमा का जन्म: माना जाता है कि इसी महीने में चंद्रमा का जन्म हुआ था। इसलिए जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या जिन्हें मानसिक तनाव रहता है, उनके लिए फाल्गुन में चंद्र देव की पूजा फलदायी होती है।
  3. पितृ शांति: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों का तर्पण करने से वंश वृद्धि और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
  4. शुद्धता का वास: इस महीने शुद्ध जल से स्नान और भगवान को अबीर व सफेद फूल अर्पित करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है।

इन देवी-देवताओं की करें विशेष आराधना

फाल्गुन के दौरान तीन मुख्य स्वरूपों की पूजा का विधान है:

  • भगवान शिव: महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण और अभिषेक करने से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है।
  • श्री कृष्ण: फाल्गुन को कान्हा की भक्ति का मास कहा जाता है। फुलेरा दूज से ही मंदिरों में फाग उत्सव और गुलाल चढ़ाने की परंपरा शुरू हो जाती है।
  • चंद्र देव: मानसिक शांति और शीतलता प्राप्त करने के लिए फाल्गुन की पूर्णिमा और चंद्रमा की पूजा की जाती है।
  • भगवान विष्णु: आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष और श्री हरि की पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

फाल्गुन मास 2026: एक नजर में

विवरणतिथि / जानकारी
प्रारंभ तिथि02 फरवरी 2026
समापन तिथि03 मार्च 2026
सबसे बड़ा पर्वमहाशिवरात्रि (15 Feb) और होली (4 March)
विशेष उपासनाशिव, कृष्ण, चंद्र देव और विष्णु जी

फाल्गुन मास हमें सिखाता है कि पुरानी चीजों (शीत ऋतु और गिले-शिकवे) को छोड़कर नई शुरुआत (वसंत और भाईचारा) कैसे की जाए। यदि आप इस पूरे महीने सात्विक रहकर दान-पुण्य और भक्ति करते हैं, तो साल के अंत के साथ आपके कष्टों का भी अंत होता है।

By News Scoop Desk

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