न्यूज स्कूप : वह ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित क्षण आज अयोध्या में संपन्न हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के भव्य शिखर पर धर्म ध्वज फहराया। अभिजीत मुहूर्त के शुभ समय पर ध्वजारोहण के साथ ही, अयोध्या नगरी में रामराज की पुनर्स्थापना का संदेश पूरे विश्व में चला गया।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल समेत कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
अयोध्या दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले भव्य रोड शो किया। साकेत कॉलेज से रामजन्मभूमि तक लगभग डेढ़ किमी लंबे इस मार्ग पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए और प्रधानमंत्री पर जमकर फूलों की वर्षा की। यह रोड शो अयोध्यावासियों के उत्साह और खुशी का प्रतीक बन गया।
रामलला के गर्भगृह में दर्शन और ध्वजारोहण से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने परिसर में स्थित विभिन्न मंदिरों का दौरा किया और पूजा-अर्चना की।
- सप्त ऋषि मंदिर: उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सप्त ऋषियों के मंदिर में पूजा की। यह मंदिर महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी को समर्पित है।
- शेषावतार मंदिर: इसके बाद प्रधानमंत्री ने रामजन्मभूमि परिसर में स्थित शेषावतार मंदिर में भगवान शेषावतार लक्ष्मण की पूजा की और विशेष अनुष्ठान संपन्न किया। उन्होंने मंदिर से जुड़े जलाशय (टैंक) का भी अवलोकन किया।
ये सभी अनुष्ठान राम मंदिर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भव्यता को दर्शाते हैं। इसके उपरांत, पीएम मोदी ने रामलला के गर्भगृह में पूजा-अर्चना की।
अयोध्या राम मंदिर के ऊपर फहराया गया भगवा ध्वज विशेष तौर पर तैयार कराया गया था। यह ध्वज 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा है, जिसे मंदिर के शिखर पर पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर शैली में लहराया गया।
इस ध्वज पर भगवान राम की वीरता का प्रतीक चमकता हुआ सूरज, ओम का निशान और रघुवंश का प्रतीक कोविदार वृक्ष अंकित है। केसरिया रंग का यह ध्वज सनातन परंपरा में भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।
इस ऐतिहासिक ध्वजारोहण कार्यक्रम के साथ ही, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से पहली बार श्रीराम विवाहोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसके लिए जनकपुर से तिलक भी अयोध्या पहुंच चुका है।
