न्यूज स्कूप : बच्चे का जन्म एक महिला के जीवन का सबसे सुखद लेकिन शारीरिक रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण अनुभव होता है। प्रसव के दौरान एक महिला के शरीर को इतनी पीड़ा से गुजरना पड़ता है, जिसकी तुलना कई हड्डियों के एक साथ टूटने से की जाती है। प्रसव के बाद शरीर को सामान्य होने में कई हफ्तों का समय लगता है। इस दौरान लोचिया (डिलीवरी के बाद की ब्लीडिंग), यूट्रस का सिकुड़ना और हार्मोनल बदलाव जैसी प्रक्रियाएं चलती रहती हैं।
भारत में सदियों से डिलीवरी के बाद दादी-नानी के बताए पारंपरिक तरीकों से महिलाओं की देखभाल की जाती रही है। लेकिन आज के आधुनिक युग में अक्सर इन ‘पुराने’ तरीकों को लेकर सवाल उठते हैं। क्या वाकई सिर पर कपड़ा बांधना या एसी-पंखा बंद रखना जरूरी है? इस विषय पर फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर डीके गुप्ता ने वैज्ञानिक नजरिए से विस्तार से जानकारी साझा की है।
दादी-नानी हमेशा कहती हैं कि नई मां को फर्श पर नंगे पैर नहीं चलना चाहिए। डॉक्टर डीके गुप्ता इस बात से काफी हद तक सहमत हैं। उनके अनुसार, डिलीवरी के बाद महिला की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) काफी कम हो जाती है।
- गर्माहट की जरूरत: शरीर को रिकवरी के लिए आराम के साथ-साथ सही गर्माहट की भी जरूरत होती है। नंगे पैर फर्श पर चलने से शरीर का तापमान गिर सकता है, जिससे मांसपेशियों में दर्द बढ़ सकता है।
- गर्म पानी: गुनगुना पानी पीना पाचन के लिए अच्छा है, लेकिन डॉक्टर सलाह देते हैं कि पानी बहुत ज्यादा गर्म नहीं होना चाहिए, जिससे गले या पेट में तकलीफ हो।
अक्सर देखा जाता है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं का सिर हर समय कपड़े से ढका रहता है। डॉक्टर का कहना है कि इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि शरीर की अधिकांश गर्मी सिर के जरिए बाहर निकलती है।
- कब है जरूरी: नहाने के तुरंत बाद या बाहर ठंडी हवा में निकलते समय सिर ढकना सही है ताकि सर्दी-जुकाम से बचा जा सके।
- कब है गलत: घर के अंदर हर समय सख्ती से सिर ढके रखना जरूरी नहीं है। इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि यह रिकवरी तेज करता है।
पुराने समय में माना जाता था कि हवा लगने से प्रसव के बाद ‘वात’ दोष बढ़ जाता है, इसलिए पंखा-एसी बंद कर दिया जाता था।
- डॉक्टर की राय: डॉक्टर डीके गुप्ता कहते हैं कि मां और बच्चे को पसीने और घबराहट में रखना गलत है। कमरे का तापमान 27-28 डिग्री सेल्सियस के बीच बनाए रखना सबसे बेहतर है। इसके लिए मध्यम गति पर पंखा या कंट्रोल तापमान पर एसी चलाया जा सकता है। बस ध्यान रहे कि सीधी हवा मां के शरीर पर न पड़े।
डिलीवरी के बाद गोंद के लड्डू, हरीरा और घी-मसाले वाला खाना पारंपरिक रूप से दिया जाता है।
- सावधानी: डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि बहुत अधिक कैलोरी, घी और मसाले वाला खाना ‘इनडाइजेशन’ (अपच) और वजन बढ़ने का कारण बन सकता है।
- सही डाइट: खाना पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए लेकिन वह सुपाच्य (Easy to digest) भी हो। डाइट में संतुलित प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम शामिल करें, न कि केवल भारी घी-तेल।
| परंपरा | वैज्ञानिक दृष्टिकोण | सुझाव |
| नंगे पैर न चलना | सही है, ठंड से मांसपेशियों में जकड़न हो सकती है। | चप्पल या जुराबें पहनें। |
| सिर ढकना | आंशिक रूप से सही (नहाने के बाद/बाहर जाते समय)। | हर समय जरूरी नहीं। |
| एसी-पंखा बंद | गलत, वेंटिलेशन और सामान्य तापमान जरूरी है। | 27-28 डिग्री तापमान रखें। |
| भारी घी-तेल का भोजन | गलत, इससे कब्ज और मोटापा बढ़ सकता है। | सुपाच्य और संतुलित आहार लें। |
दादी-नानी के नुस्खे अनुभव पर आधारित हैं और उनमें से कई काफी प्रभावी हैं। हालांकि, डॉक्टर का मानना है कि हमें परंपराओं को ‘साइंटिफिक रीजन’ के साथ जोड़कर देखना चाहिए। यदि किसी महिला को कोई विशेष मेडिकल कंडीशन है, तो उसे रहन-सहन और खान-पान में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
