न्यूज स्कूप : धर्म नगरी वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन की अभिलाषा रखने वाले लाखों भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है। महाराज जी की प्रतिदिन निकलने वाली पदयात्रा के समय में शनिवार (20 दिसंबर 2025) से बड़ा बदलाव कर दिया गया है। अब भक्तों को महाराज जी की एक झलक पाने के लिए कड़ाके की रात में जागने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि वे शाम के समय उनके दर्शन कर सकेंगे।
प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा पहले रोजाना तड़के सुबह 2:00 बजे निकला करती थी। लेकिन शनिवार से यह समय बदलकर अब शाम 5:00 बजे कर दिया गया है। शनिवार शाम जब महाराज जी श्रीकृष्ण शरणम् से अपने अनुयायियों के साथ पैदल निकले, तो नजारा देखने लायक था। सड़क के दोनों ओर हजारों भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा और पूरा मार्ग ‘राधा-राधा’ के जयकारों से गूंज उठा।
पदयात्रा के समय में अचानक हुए इस बदलाव के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण माने जा रहे हैं:
- भक्तों की सुविधा और सर्दी का सितम: वृंदावन में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। सुबह 2 बजे के दर्शन के लिए भक्त पिछली शाम से ही सड़कों पर कतारों में लग जाते थे। 10 से 12 डिग्री के कम तापमान में घंटों खुले आसमान के नीचे खड़े रहना भक्तों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए कष्टकारी साबित हो रहा था।
- महाराज जी का स्वास्थ्य: प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भी डॉक्टरों और आश्रम प्रबंधन ने शाम के समय को अधिक उपयुक्त माना है।
जैसे ही पदयात्रा का समय शाम 5 बजे हुआ, दर्शनार्थियों की संख्या में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। रात की तुलना में शाम को दर्शन करना आसान होने के कारण भीड़ पहले से दोगुनी हो गई है।
- प्रशासनिक मुश्किलें: सीओ सदर संदीप सिंह ने बताया कि पदयात्रा का समय बदलने से पुलिस के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। शाम के समय सड़कों पर सामान्य ट्रैफिक का दबाव भी अधिक रहता है। उन्होंने कहा:
“समय बदलने से हमें रूट मैनेजमेंट दोबारा करना पड़ रहा है। हम आश्रम प्रबंधन से बात करेंगे। यदि पदयात्रा स्थायी रूप से शाम 5 बजे ही रहेगी, तो इसके लिए एक नया और विस्तृत रूट मैप तैयार करना होगा ताकि आम जनता और भक्तों को परेशानी न हो।”
महाराज जी की यह पदयात्रा श्रीकृष्ण शरणम् से शुरू होकर श्री राधा केलिकुंज आश्रम तक जाती है। इस दौरान महाराज जी पैदल चलते हुए भक्तों का अभिवादन स्वीकार करते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं।
भक्तों के लिए यह बदलाव किसी बड़े उपहार से कम नहीं है, क्योंकि अब वे बिना ठंड की परवाह किए दिन की रोशनी में अपने आराध्य संत के दर्शन कर पा रहे हैं।
