न्यूज स्कूप : भारत में तेजी से उभरते त्वरित आपूर्ति (Quick Commerce) बाजार में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। ‘सुपरफास्ट स्पीड’ को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताने वाली कंपनियों ने अब अपनी रणनीति बदल दी है। केंद्र सरकार की सख्ती और डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच ब्लिंकिट के बाद अब जेप्टो (Zepto), स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) और फ्लिपकार्ट मिनट्स (Flipkart Minutes) ने भी अपने मंचों से ’10 मिनट में डिलीवरी’ का चर्चित दावा हटा दिया है।
यह फैसला केवल एक व्यापारिक बदलाव नहीं है, बल्कि उन लाखों डिलीवरी पार्टनर्स के लिए एक बड़ी जीत है जो चंद मिनटों की डेडलाइन को पूरा करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर वाहन दौड़ाते थे।
पिछले सप्ताह केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने क्विक कॉमर्स क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की थी। इस बैठक में सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि व्यापारिक मुनाफे और ‘स्पीड’ के चक्कर में श्रमिकों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- अपील और निर्देश: मंत्री मंडाविया ने सुझाव दिया था कि ’10 मिनट डिलीवरी’ जैसे सख्त समय-बद्ध वादे न केवल डिलीवरी कर्मियों पर मानसिक दबाव डालते हैं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ाते हैं।
- कंपनियों का रुख: सरकार के इस मानवीय दृष्टिकोण के बाद कंपनियों ने स्वेच्छा से अपनी ब्रांडिंग में बदलाव करना शुरू किया। मंगलवार को ब्लिंकिट ने इसकी शुरुआत की, जिसके 24 घंटे के भीतर जेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट ने भी अपने विज्ञापनों और ऐप्स से समय-सीमा के दावों को हटा लिया।
इस ऐतिहासिक बदलाव के पीछे गिग वर्कर्स (Gig Workers) का लंबा संघर्ष भी शामिल है।
- राष्ट्रव्यापी हड़ताल: नए साल की पूर्व संध्या (31 दिसंबर 2025) पर हजारों डिलीवरी कर्मियों ने ’10 मिनट डिलीवरी’ मॉडल के विरोध में काम बंद किया था।
- श्रमिकों की मांग: गिग वर्कर्स एसोसिएशन का तर्क था कि यह अल्ट्रा-फास्ट मॉडल उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरनाक है। साथ ही, कई मामलों में काम के बढ़ते दबाव के अनुपात में उन्हें उचित भुगतान नहीं मिल रहा था।
- एसोसिएशन का स्वागत: डिलीवरी कर्मियों के संगठनों ने कंपनियों के इस ताजा फैसले का स्वागत किया है और इसे कार्य परिस्थितियों में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
वर्तमान में भारत में सात प्रमुख खिलाड़ी इस दौड़ में शामिल हैं। देखें किसने बदलाव किया और कौन अब भी ’10 मिनट’ पर अड़ा है:
| कंपनी का नाम | ’10 मिनट’ वादा हटाया? | वर्तमान स्थिति |
| ब्लिंकिट (Blinkit) | ✅ हाँ | सबसे पहले बदलाव लागू किया। |
| जेप्टो (Zepto) | ✅ हाँ | ऐप और विज्ञापन से ब्रांडिंग हटाई। |
| स्विगी इंस्टामार्ट | ✅ हाँ | अब सुरक्षा और गुणवत्ता पर ध्यान। |
| फ्लिपकार्ट मिनट्स | ✅ हाँ | वादे को बदलकर ‘तेज आपूर्ति’ किया। |
| बिगबास्केट (BB Now) | ❌ नहीं | ऐप पर अब भी 10 मिनट का उल्लेख है। |
| जियोमार्ट / अमेजन | – | विस्तृत दिशा-निर्देशों का इंतजार। |
कंपनियों के इस कदम का मतलब यह नहीं है कि आपकी ग्रॉसरी आने में घंटों लगेंगे।
- फोकस में बदलाव: अब कंपनियां ’10 मिनट’ की गारंटी के बजाय ‘सुरक्षित और त्वरित’ आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित करेंगी।
- अदृश्य समय-सीमा: डिलीवरी अभी भी तेज होगी क्योंकि कंपनियों का ‘डार्क स्टोर’ नेटवर्क मजबूत है, लेकिन अब डिलीवरी पार्टनर पर किसी विशेष समय सीमा का दबाव नहीं होगा, जिससे सड़क सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
’10 मिनट डिलीवरी’ का वादा हटाना इस बात का प्रमाण है कि भारत में अब ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ-साथ ‘ईज ऑफ वर्किंग’ को भी महत्व दिया जा रहा है। सरकार, कंपनियां और श्रमिक संघों के बीच का यह तालमेल भविष्य में एक सुरक्षित गिग इकोनॉमी की नींव रखेगा।
