न्यूज स्कूप : केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद अब देशभर के सभी राज्यों में राजभवन (Governor’s House) का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर लोकभवन कर दिया गया है। यह बदलाव मोदी सरकार की उस व्यापक विचारधारा का हिस्सा है, जिसके तहत शासन और सत्ता से जुड़े प्रतीकात्मक नामों को ‘अधिकार’ से हटाकर ‘कर्तव्य’ और ‘जनसेवा’ पर केंद्रित किया जा रहा है।
पिछले एक दशक में कई बड़े संस्थागत और ऐतिहासिक नामों में बदलाव देखने को मिला है, जिसने यह साफ संदेश दिया है कि सत्ता एक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। राजभवन को लोकभवन में बदलना इसी सोच में एक बड़ा बदलाव है, जो सरकार को जनता की सेवा करने वाली, न कि सिर्फ सत्ता चलाने वाली संस्था के रूप में स्थापित करता है।
राजभवन (अर्थात् राजा का निवास) का नाम बदलकर लोकभवन (अर्थात् जनता का निवास) करना एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक कदम है। यह दर्शाता है कि राज्यपाल का पद अब सत्ता का लाभ उठाने के लिए नहीं, बल्कि जनता के प्रति सेवा और जिम्मेदारी निभाने के लिए है। यह बदलाव ऐसे ही अन्य नाम परिवर्तनों की श्रृंखला में आता है:
| पुराना नाम (प्रतीक) | नया नाम (संदेश) |
| राजपथ (राजाओं का रास्ता/शक्ति का प्रतीक) | कर्तव्य पथ (कर्तव्य का रास्ता) |
| रेस कोर्स रोड (विशेषाधिकार/प्रतिष्ठा) | लोक कल्याण मार्ग (लोक कल्याण का रास्ता) |
| सेंट्रल सचिवालय (प्रशासनिक केंद्र) | कर्तव्य भवन (कर्तव्य का भवन) |
| प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर | सेवा तीर्थ (सेवा का पवित्र स्थान) |
राजभवन को लोकभवन बुलाने का सीधा असर शासन की सोच पर पड़ेगा। यह बदलाव दर्शाता है कि शासन की हर ईंट-पत्थर में “कर्तव्य” और “जनसेवा” का भाव जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति जनता के भले के लिए काम करने का भाव दिखाएं, न कि सिर्फ प्रतिष्ठा का।
गुजरात और महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस बदलाव की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि गुजरात राजभवन का नाम अब ‘गुजरात लोकभवन’ होगा। यह संकेत हमें बताते हैं कि भारतीय लोकतंत्र अब ताकत और आदर से ज्यादा सेवा की प्राथमिकता दे रहा है।
यह नाम बदलना सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि यह लोकतंत्र की दिशा बदलने वाली उस सोच को दर्शाता है जो ‘जनता सबसे पहले’ के सिद्धांत पर आधारित है। हर एक ऑफिस, बिल्डिंग और नाम इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार का काम है जनता की सेवा करना। यह एक नई शुरुआत है जिसमें पॉवर को नहीं, बल्कि जिम्मेदारी को महत्व मिलेगा।
