न्यूज स्कूप : आस्था, परंपरा और भक्ति का अनूठा संगम, राजिम कुंभ कल्प मेला इस साल 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक आयोजित होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर लगने वाले इस मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। राजिम को ‘छत्तीसगढ़ का प्रयाग’ कहा जाता है और यहाँ का कल्पवास ठीक वैसा ही महत्व रखता है जैसा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगने वाले माघ मेले का होता है।
धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, राजिम वही स्थान है जहाँ से सृष्टि की रचना हुई थी। यहाँ हर साल देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु पुण्य स्नान और भगवान राजीव लोचन के दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
राजिम को लेकर कई ऐसी मान्यताएं हैं जो आज भी शोध का विषय बनी हुई हैं:
- सृष्टि का उद्गम स्थल: माना जाता है कि सृष्टि की शुरुआत में भगवान विष्णु की नाभि से निकला कमल यहीं स्थित था और ब्रह्माजी ने इसी स्थान से सृष्टि की रचना की थी।
- भगवान का विश्राम गृह: स्थानीय लोगों का मानना है कि राजीव लोचन मंदिर में भगवान विष्णु प्रतिदिन विश्राम करने आते हैं। दोपहर की आरती के समय लगाए गए भोग को लेकर कहा जाता है कि भगवान स्वयं उसे ग्रहण करते हैं और भोग की थाली पर अक्सर उंगलियों के निशान देखे जाते हैं।
- चार धाम की यात्रा: मान्यता है कि जो व्यक्ति किन्हीं कारणों से चार धाम की यात्रा नहीं कर पाया है, वह यदि राजिम मेले में आकर राजीव लोचन मंदिर के दर्शन कर ले, तो उसे चारों धाम की यात्रा के समान फल मिलता है।
9वीं सदी में निर्मित यह मंदिर वास्तुकला और आध्यात्मिकता का अद्भुत नमूना है।
- तीन अवस्थाएं: मंदिर में स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा सुबह बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और रात में वृद्धावस्था में दिखाई देती है।
- जगन्नाथ पुरी का संबंध: कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक भक्त राजिम में भगवान के दर्शन न कर ले।
- वास्तुकला: मंदिर के बारह स्तंभों पर अष्टभुजा वाली माता दुर्गा, गंगा, यमुना और भगवान के राम व नृसिंह अवतारों के सुंदर चित्र उकेरे गए हैं।
| विवरण | जानकारी |
| प्रारंभ तिथि | 01 फरवरी 2026 (माघ पूर्णिमा) |
| समापन तिथि | 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) |
| स्थान | राजिम, जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़) |
| नदियों का संगम | महानदी, पैरी और सोंढूर |
| मुख्य आकर्षण | शाही स्नान, कल्पवास, संत समागम |
मेले की पवित्रता को देखते हुए स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर चर्चा है कि क्या पिछले वर्षों की तरह इस बार भी 15 दिनों तक शराब और मांस की दुकानें बंद रहेंगी। आमतौर पर प्रशासन मेले के दौरान इन्हें बंद रखने का आदेश जारी करता है, लेकिन इस बार अब तक आधिकारिक आदेश का इंतजार है। जनभावनाओं के अनुसार, तीर्थस्थल की मर्यादा के लिए मेले के दौरान शराब व मांस की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होनी चाहिए।
राजिम कुंभ केवल एक मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है। यदि आप भी आध्यात्मिक शांति और प्राचीन रहस्यों को करीब से देखना चाहते हैं, तो 1 फरवरी से शुरू हो रहे इस महाकुंभ का हिस्सा जरूर बनें।
